ताज़ा खबरें

दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ मुश्किल, बहुत खराब होती जा रही है वायु गुणवत्ता, 390 पहुंचा AQI

दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हुआ मुश्किल, बहुत खराब होती जा रही है वायु गुणवत्ता, 390 पहुंचा AQI

 

दिल्ली-एनसीआर में दिन-प्रतिदिन सांस लेना दुर्लभ होता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण के कारण वायु की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। दिल्ली से सटे शहरों का भी बहुत बुरा हाल है। जानकारी के मुताबिक नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर 397 के साथ ‘बहुत खराब’ श्रेणी में हो गया है। यूपी और हरियाणा के शहरों के अलावा पंजाब और महाराष्ट्र में एयर क्वालिटी लगातार कई दिनों से खराब दर्ज की जा रही है।

SAFAR-India के अनुसार, दिल्ली में एवरेज एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 343 है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है. जबकि पंजाब के बठिंडा शहर में वायु गुणवत्ता में थोड़ी सुधार नजर आ रही है। बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए इस वक्त ग्रैप-2 लागू किया गया है। वहीं पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुधवार को घोषणा की कि शहर की सरकार उन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाएगी जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार पांच बार महत्वपूर्ण 400 अंक से अधिक है।

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वायु गुणवत्ता को स्वीकार्य स्तर पर बनाए रखना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि उन्होंने नोडल अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पैमाने के अनुसार, शून्य और 50 के बीच रीडिंग को “अच्छा” माना जाता है, 51 से 100 के बीच रीडिंग “संतोषजनक” के अंतर्गत आती है, 101 से 200 के बीच “मध्यम” मानी जाती है, 201 से 300 के बीच रीडिंग को “खराब” के रूप में वर्गीकृत किया जाता है. 301 से 400 को “बहुत खराब” और 401 से 500 को “गंभीर” माना जाता है।

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button