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चंद्र ग्रहण के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगाई डुबकी, जानें क्या होता है चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगाई डुबकी, जानें क्या होता है चंद्र ग्रहण

 

बीती 28-29 अक्टूबर की रात को चंद्र ग्रहण लगा जिसे भारत समेत दुनिया के एक बड़े हिस्से में लोग देखा गया। यह एक खंडग्राह चंद्र ग्रहण है। दरअसल जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के कुछ भाग पर पड़ती है तो इसे खंडग्रास यानि आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण लगना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मौके पर हरिद्वार में आज यानी रविवार को चंद्रग्रहण के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में डुबकी लगाई।

 

 

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन चंद्रदेव की विशेष पूजा की जाती है। शरद पूर्णिमा के दिन गाय के दूध और चावल की खीर बनाने की परंपरा है और उसे पूरी रात के लिए चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है और अमृत वर्षा करता है जिससे उस खीर में चंद्रमा के औषधीय व दैवीय गुण समाहित हो जाते हैं। लेकिन कई सालों बाद 2023 में शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है।

जानें क्या होता है चंद्र ग्रहण   

बता दें कि हमारे सौर मंडल के केंद्र में सूर्य है। सूर्य हमारे सबसे करीब का सितारा है, जिसकी अपनी ऊर्जा है। इसकी अपनी गर्मी और चमक है, जिससे पृथ्वी समेत बाकी ग्रहों पर प्रकाश पहुंचता है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी का चक्कर लगाता है। जब चक्कर लगाने के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाए तो चंद्र ग्रहण होता है। इससे पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है।

गौरतलब है कि साल 2023 में दो चंद्र ग्रहण थे। पहला 5 मई को उपच्छाया चंद्रग्रहण था। वहीं दूसरा चंद्र ग्रहण 28-29 अक्टूबर को होगा। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण है। जो पूर्वी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में दिखाई दिया। बता दें कि चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि घटना के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में किस प्रकार हैं।

 

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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