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केजरीवाल सरकार को राहत, गृह मंत्रालय ने दिल्ली के बजट को दी मंजूरी

केजरीवाल सरकार को राहत, गृह मंत्रालय ने दिल्ली के बजट को दी मंजूरी

सीएम केजरीवाल के आरोपों के बीच अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के बजट को विधासभा में पेश करने की मंजूरी दे रही है। दरअसल, दिल्ली गृह मंत्रालय ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार से विज्ञापन, पूंजीगत व्यय पर खर्च और आयुष्मान भारत जैसे मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगते हुए दिल्ली के बजट को विधानसभा में पेश होने पर रोक लगा दी थी।

उसके बाद से दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को बजट पेश न होने को लेकर बीजेपी और आप के बीच सियासी घमासान जारी है. दूसरी तरफ सियासी गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि अगर बीजेपी-आप के बीच विवाद नहीं सुलझे और 31 मार्च 2023 तक बजट दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं हुआ तो दिल्ली सरकार को विकट स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।  

गौरतलब है कि बजट की पेशी पर रोक लगाए जाने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने निर्धारित घोषणा से कुछ घंटे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के बजट को पारित करने का आग्रह किया। अरविंद केजरीवाल ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि “देश के 75 साल के इतिहास में यह पहली बार है कि राज्य के बजट को रोका गया है। आप दिल्ली के लोगों से परेशान क्यों हैं?” मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पत्र लिख पीएम मोदी से आग्रह किया और कहा, “दिल्ली के लोग आपसे हाथ जोड़कर आग्रह करते हैं कि आप अपना बजट पास करें.”

बता दें कि दिल्ली सरकार के वित्त मंत्री कैलाश गहलोत की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि ‘रहस्यमयी कारणों से दिल्ली के मुख्य सचिव ने पत्र को 3 दिन तक छिपाए रखा. मुझे पत्र के बारे में आज यानी 20 मार्च 2023 को दोपहर 2 बजे ही पता चला. गृह मंत्रालय के पत्र वाली फाइल मेरे पास आधिकारिक तौर पर आज शाम छह बजे यानी दिल्ली विधानसभा में बजट पेश होने के ठीक एक दिन पहले पेश की गई.’

बयान में आगे कहा गया है, कि ‘यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि गृह मंत्रालय दिल्ली सरकार के बजट के बारे में झूठ फैला रही है. अगले वर्ष पूंजीगत व्यय के लिए लगभग 22,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि विज्ञापनों के लिए आवंटन केवल 550 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष के समान है. एमएचए द्वारा उठाई गई चिंताएं अप्रासंगिक हैं और दिल्ली सरकार के अगले साल के बजट को खराब करने के लिए ऐसा प्रतीत होता है।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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