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अब हेट्रो की टोसीलिजुमैब से होगा कोविड मरीजों का इलाज, DGCI ने दी आपातकालीन की मंजूरी

दवा कंपनी हेट्रो ने सोमवार को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि उसे अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के वयस्क मरीजों के इलाज के लिए टोसिलिजुमाब के बायोसिमिलर संस्करण के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल गयी है।

किन मरीज़ों पर इस्तेमाल होगी यह दवा ?

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कोविड -19 विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जुलाई में सिफारिश की थी कि गंभीर रूप से बीमार कोविड -19 रोगियों के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। मंजूरी के बाद अब अस्पताल में भर्ती वयस्कों में कोरोना के इलाज के लिए जेनेरिक दवा टोसिलिजुमैब का इस्तेमाल डॉक्टर कर पाएंगे। कंपनी ने बयान में कहा कि ये दवा ऐसे मरीजों पर इस्तेमाल की जा सकेगी, जो सिस्टेमैटिक कॉर्टिकोस्टेरॉइड, जरूरी सप्लीमेंटल ऑक्सीजन, वेंटीलेटर और एक्स्ट्राकॉर्पोरल मेंमबरेन ऑक्सीजनसेशन पर हैं।

कौन करेगा इसका प्रोडक्शन और कब तक होगी दवा उपलब्ध ?

हेटेरो की बायोलॉजिक्स यूनिट ‘हेटेरो बायोफार्मा’ हैदराबाद में अपनी बायोलॉजिक्स फैसिलिटी में इस दवा का प्रोडक्शन करेगी। टोसीरा बायोसिमिलर का वर्जन है और सितंबर के अंत तक देश में उपलब्ध होगी।

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हेटेरो ग्रुप के अध्यक्ष डा बी पार्थ सारधी रेड्डी ने DCGI मंज़ूरी के बाद दिया यह बयान।

हेटेरो ग्रुप के अध्यक्ष डा बी पार्थ सारधी रेड्डी ने कहा, ‘हम भारत में हेटेरो के टोसीलिजुमैब (टोसीरा) को मिले अप्रूवल से खुश हैं। यह हमारी तकनीकी क्षमताओं और कोविड देखभाल के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सीय लाने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। टोसीलिजुमैब की वैश्विक कमी को देखते हुए भारत में आपूर्ति सुरक्षा के लिए यह अप्रूवल अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।’

गठिया रोगियों को दी जाती रही है यह दवा।

बता दे कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों के इलाज के लिए जिस टोसिलिजुमैब दवा को मंजूरी दी गई है उसे अब तक रूमेटाइड अर्थराइटिस के रोगियों के उपचार में प्रयोग में लाया जाता रहा है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने इसे कोविड-19 में भी फायदेमंद साबित होने का दावा किया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि इस दवा से अस्पताल में भर्ती रोगियों में कोरोना संक्रमण की गंभीरता और उससे होने वाली मौत के खतरे को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा रोगियों को वेंटिलेटर पर जाने से भी बचा सकती है।

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