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भोपाल में नशीली दवाओं की तस्करी का भंडाफोड़: इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

भोपाल में नशीली दवाओं की तस्करी का भंडाफोड़: इंदौर क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

भोपाल: इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल में नशीली दवाओं की अवैध तस्करी का खुलासा किया है। इस ऑपरेशन में 9.30 लाख अल्प्राजोलम टैबलेट्स और 5,240 कोडीन सिरप की बोतलें जब्त की गई हैं, जिनकी ब्लैक मार्केट में कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भोपाल के नामी दवा कारोबारी का नाम भी शामिल है।

कैसे खुला यह नेटवर्क?

23 जनवरी को इंदौर क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए 360 कोडीन सिरप बोतलों के साथ मोइनुद्दीन उर्फ मोना और शावेज खान को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे यह सिरप भोपाल के जीतू यादव से खरीदते थे। पुलिस ने जीतू को भी गिरफ्तार कर उसके पास से 1,950 अल्प्राजोलम टैबलेट्स जब्त कीं।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क भोपाल, सतना और आसपास के इलाकों तक फैला था और इसमें बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की तस्करी की जा रही थी।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका

1.आकाश जैन (47): स्वस्तिक एंटरप्राइज़ेज नामक मेडिकल स्टोर का मालिक, जो कोविड-19 के बाद इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया था। उसकी दुकान तस्करी का मुख्य अड्डा बन गई थी।

2.अमर सिंह (25): बीएससी का छात्र, जो इन दवाओं को महंगे दामों पर खरीदकर ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचता था।

3.अमन रावत (25): भोपाल में 9 साल से फार्मास्युटिकल मार्केटिंग से जुड़ा था और इस नेटवर्क में ग्राहकों तक दवाएं पहुंचाने का काम करता था।

कैसे होती थी तस्करी?

दवाओं की डिलीवरी सुबह 9 बजे से पहले या रात 9 बजे के बाद की जाती थी, ताकि बाजार में कम भीड़ हो और संदेह न पैदा हो। ये मेडिकल दुकानों की आड़ में बेची जाती थीं ताकि व्यापार कानूनी लगे। नेटवर्क कई शहरों तक फैला था और इसमें कई लोग शामिल थे।

अवैध दवाओं का बढ़ता खतरा

अल्प्राजोलम: डॉक्टर द्वारा अवसाद (डिप्रेशन) और अनिद्रा (इंसोम्निया) के इलाज के लिए दी जाती है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नशे की लत का कारण बन सकता है।

कोडीन सिरप: आमतौर पर खांसी के इलाज में इस्तेमाल होता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में सेवन से यह नशे की लत और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

आगे की कार्रवाई

डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए विस्तृत जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।

यह कार्रवाई अवैध दवा तस्करी के खिलाफ सख्त संदेश है और इससे नशीली दवाओं के कारोबार पर लगाम लगने की उम्मीद है। पुलिस प्रशासन इस तरह के अपराधों पर कड़ी नजर बनाए हुए है और आगे भी सख्त कदम उठाने की योजना बना रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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