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गाजा में 15 महीने बाद शांति की पहल, लेकिन क्या जंग वाकई थमेगी?

गाजा में 15 महीने बाद शांति की पहल, लेकिन क्या जंग वाकई थमेगी?

इजरायल और हमास के बीच 15 महीने से जारी घातक युद्ध के खत्म होने की उम्मीद जगी है। शुक्रवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐलान किया कि दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह समझौता कतर की राजधानी दोहा में वार्ताकारों की मध्यस्थता से हुआ है। इस ऐतिहासिक पहल के तहत गाजा में लड़ाई रोकने और बंधक बनाए गए दर्जनों इजरायली नागरिकों को रिहा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “हम अपने सभी बंधकों (जीवित और मृत दोनों) को वापस लाएंगे। मैंने एक विशेष टास्क फोर्स को तैयार रहने का निर्देश दिया है, जो गाजा से लौटने वाले बंधकों को लेगी।” उन्होंने बताया कि समझौते को मंजूरी देने के लिए इजरायल की सुरक्षा मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई जाएगी। समझौते के तहत रविवार, 19 जनवरी 2025 से युद्ध विराम लागू होगा।

युद्ध का भयंकर दौर

इस संघर्ष की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी, जब हमास ने इजरायल पर हमला किया। इस हमले में 1,200 लोग मारे गए और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इजरायल ने गाजा पर व्यापक हवाई हमले किए, जिसमें अब तक 46,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है।

हालांकि, युद्ध विराम की घोषणा के बाद भी हमले थमे नहीं। बुधवार, 15 जनवरी को इजरायल ने गाजा पट्टी पर हवाई हमले किए, जिनमें 86 लोगों की मौत हो गई और 258 घायल हुए। गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसी के प्रवक्ता महमूद बसल ने इसे युद्ध विराम के बाद का सबसे बड़ा हमला बताया।

समझौते का राजनीतिक विरोध

प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए यह समझौता आसान नहीं था। उनके दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगियों ने इसका कड़ा विरोध किया। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इटमार बेन-ग्वीर ने तो यहां तक धमकी दी थी कि अगर यह समझौता मंजूर हुआ, तो वे सरकार छोड़ देंगे। हालांकि, नेतन्याहू ने कहा, “हम युद्ध के सभी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समझौता गाजा में स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम है।”

क्या बदलेंगे हालात?

गाजा पट्टी में 15 महीने से जारी हिंसा के बाद इस युद्ध विराम समझौते से मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस पहल की सराहना की है। हालांकि, इजरायल और हमास के बीच जारी अविश्वास और राजनीतिक तनाव को देखते हुए यह देखना होगा कि यह समझौता कितना प्रभावी साबित होता है।

फिलहाल, यह समझौता गाजा में जंग की आग को बुझाने और इंसानों के जीवन को बचाने की एक कोशिश है। लेकिन क्या यह क्षेत्र में स्थायी शांति ला सकेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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