अमेरिकी दबाव के बीच क्यूबा से दूरी बना रहा वेनेजुएला, सुरक्षा ढांचे में बड़ा फेरबदल

वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद बड़े प्रशासनिक और सुरक्षा बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई अंतरिम सरकार ने क्यूबा के सुरक्षा सलाहकारों और मेडिकल स्टाफ की वापसी शुरू कर दी है। अधिकारियों और मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इसका मकसद सरकारी संस्थानों में क्यूबा की भूमिका को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब वॉशिंगटन की ओर से वेनेजुएला और क्यूबा के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सुरक्षा गठबंधन को खत्म करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
3 जनवरी को हुए एक अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद वेनेजुएला की अंतरिम सरकार ने क्यूबा और अमेरिका दोनों के साथ अपने रिश्तों की नई समीक्षा शुरू की। अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की निगरानी में कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं, जिनमें संवेदनशील सुरक्षा पदों से क्यूबाई नागरिकों को हटाना भी शामिल है। खास तौर पर खुफिया और काउंटर-इंटेलिजेंस इकाइयों में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य काउंटर-इंटेलिजेंस एजेंसी DGCIM में भी पुनर्गठन किया गया है।
मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ ही हफ्तों बाद क्यूबा के सलाहकार, सुरक्षा कर्मी और डॉक्टर धीरे-धीरे अपने देश लौटने लगे। 21 फरवरी तक यह प्रक्रिया साफ तौर पर चल रही थी और अब भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, कराकस से हवाना जाने वाली नियमित और चार्टर्ड उड़ानों के जरिए कई लोग वापस भेजे गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुले और निजी दोनों स्तरों पर वेनेजुएला से सुरक्षा क्षेत्र में क्यूबा का असर कम करने की मांग की है। इसे अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर करने की एक अहम शर्त के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि अब कई एजेंसियों में क्यूबाई कर्मियों की जगह वेनेजुएला के नागरिकों को जिम्मेदारी दी जा रही है। हालांकि कुछ क्यूबाई अभी भी देश में मौजूद हैं, लेकिन उनकी भूमिका पहले के मुकाबले काफी सीमित कर दी गई है। इसके बावजूद अंतरिम सरकार ने क्यूबा से राजनयिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कराकस की कोशिश है कि सुरक्षा मामलों में दूरी बनाई जाए, लेकिन रिश्तों को पूरी तरह तोड़े बिना, ताकि क्षेत्र में अस्थिरता न बढ़े और अमेरिका के साथ तनाव भी कम किया जा सके।





