अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा बयान, बोले- “ट्रंप-मोदी की दोस्ती असली है”

नई दिल्ली. भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों को लेकर अहम टिप्पणी की है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की दोस्ती कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक और गहरी है.
“प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के प्रिय मित्र हैं”
राजदूत गोर ने दोनों नेताओं के बीच के रिश्ते की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी राष्ट्रपति ट्रंप के ‘Dear Friend’ हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों नेताओं के बीच परस्पर विश्वास और सम्मान का स्तर काफी ऊंचा है, जो दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाता है.
भारत को मिलेगा पैक्ससिलिका में पूर्ण सदस्यता का न्योता
राजदूत गोर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि अगले महीने भारत को अमेरिका की अगुवाई वाली नई वैश्विक पहल ‘पैक्ससिलिका’ (Pax Silica) में पूर्ण सदस्य बनने का निमंत्रण दिया जाएगा. यह पहल तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है.
#WATCH दिल्ली: भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद सर्जियो गोर ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को पैक्ससिलिका में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा…”
उन्होंने कहा, “…मैं आज आपके साथ एक नई पहल भी साझा करना… pic.twitter.com/EIbaVX4egS
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 12, 2026
उन्होंने कहा, “…मैं आज आपके साथ एक नई पहल भी साझा करना चाहता हूं जिसे अमेरिका ने पिछले महीने ही शुरू किया है, जिसका नाम पैक्ससिलिका है. पैक्ससिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाली एक रणनीतिक पहल है जिसका मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा इनपुट से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स तक एक सुरक्षित, समृद्ध और इनोवेशन-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन बनाना है. पिछले महीने इसमें शामिल होने वाले देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इज़राइल शामिल हैं. आज, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को इस देशों के समूह में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा…”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय खोल सकती है. खासतौर पर टेक्नोलॉजी, आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है.





