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Trump का ऐतिहासिक शपथ ग्रहण, 40 साल बदली समारोह की जगह

 अमेरिका में इतिहास रचने जा रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शपथ ग्रहण इस बार कई मायनों में खास होने वाला है। 40 वर्षों में पहली बार यह समारोह कड़ाके की ठंड के कारण खुले में न होकर, अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग के अंदर कैपिटल रोटुंडा में आयोजित किया जाएगा। भीषण ठंड और आर्कटिक तूफान के चलते यह फैसला किया गया है। ट्रंप सोमवार, 21 जनवरी को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

 

आर्कटिक तूफान ने बदला शपथ ग्रहण का स्थान

ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा करते हुए कहा, “वाशिंगटन, डीसी में तापमान रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकता है। मैं नहीं चाहता कि लोग किसी भी तरह से आहत हों, इसलिए मैंने यह समारोह कैपिटल रोटुंडा के अंदर आयोजित करने का आदेश दिया है।”

यह वही स्थान है जहां 1985 में रोनाल्ड रीगन ने भीषण ठंड के चलते शपथ ली थी। इस बार वाशिंगटन में तापमान -7 डिग्री सेल्सियस तक गिरने का अनुमान है, जिससे तेज हवाओं का सामना करना पड़ सकता है।

 

दो ऐतिहासिक बाइबल्स से लेंगे शपथ

शपथ ग्रहण समारोह समिति ने घोषणा की है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ अपनी मां के द्वारा दी गई बाइबल और ऐतिहासिक लिंकन बाइबल पर हाथ रखकर लेंगे। यह बाइबल ट्रंप को 1955 में उनके प्राथमिक विद्यालय से स्नातक होने पर उपहार के तौर पर मिली थी। लिंकन बाइबल का पहली बार उपयोग 1861 में अब्राहम लिंकन ने अपने शपथ ग्रहण के दौरान किया था। बराक ओबामा और ट्रंप ने भी अपने पहले कार्यकाल में इसका इस्तेमाल किया था। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी पारिवारिक बाइबल का उपयोग करेंगे।

 

कार्यक्रमों का भव्य आयोजन

शपथ ग्रहण के अलावा, अन्य कार्यक्रम अपने निर्धारित स्थानों पर ही होंगे। कैपिटल वन एरेना में विजय रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें 20,000 लोग बैठ सकते है। वहां उपस्थित समर्थक स्क्रीन पर शपथग्रहण समारोह का सीधा प्रसारण देखेंगे।

 

अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति और भारत का प्रतिनिधित्व

इस समारोह में भारत से रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी अपनी पत्नी नीता अंबानी के साथ शामिल होंगे। दोनों ट्रंप के साथ एक विशेष ‘कैंडललाइट डिनर’ भी करेंगे। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग और जापान के ताकेशी इवाया भी इसमें अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

 

क्वाड मंत्रियों की बैठक पर ध्यान

शपथ ग्रहण के अगले ही दिन, 21 जनवरी को क्वाड देशों (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) के विदेश मंत्रियों की बैठक भी वाशिंगटन में होगी। इस बैठक का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना है। नई विदेश नीति का यह पहला कदम अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकताओं का संकेत देगा।

 

एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक समारोह

डोनाल्ड ट्रंप के इस शपथ ग्रहण में ठंड के बावजूद जोश और ऐतिहासिकता का मेल देखने को मिलेगा। जहां एक ओर ठंड और आर्कटिक तूफान ने इसे यादगार बना दिया है, वहीं ऐतिहासिक बाइबल्स, अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति, और बदलती कूटनीतिक रणनीतियां इसे वैश्विक ध्यान का केंद्र बना रही हैं। सोमवार को जब ट्रंप कैपिटल रोटुंडा में शपथ लेंगे, तो न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें इस समारोह पर होंगी।

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