अमेरिका से व्यापार समझौते का रूस के साथ रक्षा संबंधों पर नहीं पड़ेगा असर: रक्षा सचिव

नई दिल्ली में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ हाल ही में हुआ अंतरिम व्यापार समझौता भारत के रूस के साथ लंबे समय से चले आ रहे सैन्य और रणनीतिक संबंधों को प्रभावित नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति पर कायम है। देश की रक्षा जरूरतें किसी भी बाहरी दबाव से ऊपर हैं। अमेरिका के साथ हुआ समझौता पूरी तरह आर्थिक मुद्दों से जुड़ा है और इसका रक्षा खरीद नीतियों से सीधा संबंध नहीं है।
क्या है समझौते में?
अमेरिका के साथ हुए इस समझौते में दोनों देशों ने आपसी शुल्कों में बड़ी कटौती पर सहमति जताई है। साथ ही भारतीय निर्यात पर पहले लगाए गए अतिरिक्त शुल्क भी हटाए गए हैं। इसके बदले भारत आने वाले वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा और विमानन तकनीक की खरीद बढ़ाने का संकेत दे चुका है।
रूस के साथ रक्षा साझेदारी बरकरार
अधिकारियों ने दोहराया कि रूस भारत के रक्षा ढांचे का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। भारत की सैन्य प्रणाली का बड़ा हिस्सा रूसी उपकरणों पर आधारित है, इसलिए यह संबंध रणनीतिक रूप से अहम है।
आत्मनिर्भरता पर भी जोर
सरकार साथ ही देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने के अपने कार्यक्रम पर भी ध्यान दे रही है। लक्ष्य है कि धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम की जाए, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समझौतों और साझेदारियों को भी संतुलित रखा जाए।
सरकार का मानना है कि इस दोहरी रणनीति से भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार क्षेत्रीय तनाव के कारण प्रभावित हो रहे हैं।





