
वैज्ञानिकों ने पहली बार सूर्य के बहुत ही युवा संस्करण को अंतरिक्ष में एक विशाल गैसीय बुलबुला बनाते हुए देखा है। यह खोज NASA के चंद्रा एक्स-रे ऑब्ज़र्वेटरी की मदद से हुई है। इस बुलबुले को “एस्ट्रोस्फीयर” कहा गया है, जो पूरी तरह से युवा तारे को घेरे हुए है। एस्ट्रोस्फीयर उस तारे की सतह से निकलने वाली तेज़ कण-धारा (particle winds) से बनता है। यह बुलबुला गर्म गैस से भरा होता है और जैसे-जैसे फैलता है, यह आसपास की ठंडी गैस और धूल को पीछे धकेल देता है।
What youngster doesn’t love blowing bubbles?
For the first time, @NASAChandra caught a young Sun-like star blowing a bubble called an astrosphere. This type of bubble surrounds the star and is made by its solar wind. Our Sun has one, too! https://t.co/lZnGEqoUwg pic.twitter.com/kk8bsagz0U
— NASA (@NASA) February 23, 2026
हमारे सूर्य के चारों ओर भी इसी तरह की संरचना मौजूद है, जिसे हेलियोस्फीयर कहा जाता है। यह सूरज की हवा से बनता है और पृथ्वी को हानिकारक कॉस्मिक किरणों से बचाता है। इस खोज में पहली बार वैज्ञानिकों ने सूर्य जैसे तारे के चारों ओर एस्ट्रोस्फीयर की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त की है। आमतौर पर ऐसे तारे केवल एक चमकते बिंदु के रूप में दिखाई देते हैं, लेकिन इस तस्वीर में उनके चारों ओर फैलाव और हल्का विकिरण भी देखा गया।
तारे HD 61005 के बारे में
यह तारा, HD 61005, पृथ्वी से लगभग 120 प्रकाशवर्ष दूर है। इसका आकार और तापमान सूर्य के समान है, लेकिन यह सूर्य की तुलना में बहुत छोटा और युवा है। इसका उम्र लगभग 100 मिलियन वर्ष है, जबकि सूर्य की उम्र लगभग 5 अरब वर्ष है।
युवा होने के कारण, HD 61005 से निकलने वाली कण-धारा सूर्य की तुलना में तीन गुना तेज़ और लगभग 25 गुना घनी है। यही तेज़ हवा इस विशाल गैस के बुलबुले का निर्माण करती है और यह हमें बताती है कि अरबों साल पहले सूर्य कितना सक्रिय था।
क्यों नाम रखा गया “मॉथ”
वैज्ञानिकों ने HD 61005 तारे को “मॉथ” (Moth) नाम दिया क्योंकि इसके चारों ओर धूल इतनी अधिक है कि इन्फ्रारेड टेलीस्कोप से देखने पर यह एक पतंगे के पंख जैसी दिखाई देती है। यह धूल तारे के निर्माण के दौरान बची हुई सामग्री से बनी है, जैसे हमारे सौर मंडल में काइपर बेल्ट है।
केरी लिस (जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी) ने बताया कि यह खोज हमें सूर्य के प्रारंभिक समय में उसकी हवा और गतिविधियों को समझने में मदद करेगी। स्कॉट वोल्क (हावर्ड और स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स) ने कहा कि सूर्य की हवा न केवल पृथ्वी पर बल्कि उपग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी असर डालती है, इसलिए इस तस्वीर से भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।





