कर्तव्य पथ पर पहली बार दिखी स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल LR-AShM

सोमवार को भारत ने 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और भव्यता के साथ मनाया। इस मौके पर कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में देश की बढ़ती सैन्य और तकनीकी शक्ति की शानदार झलक देखने को मिली। परेड में कई अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को दर्शाती हैं।
परेड का सबसे बड़ा आकर्षण लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) रही। यह एक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो 1,500 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थिर और चलते लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है और दुश्मन के रडार से बचते हुए बेहद तेज गति से लक्ष्य तक पहुंच सकती है। इसे डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इस दो-चरणीय ठोस ईंधन मिसाइल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता है।
इसके अलावा परेड में कई अन्य स्वदेशी हथियार प्रणालियां भी देखने को मिलीं। इनमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम और पहली बार प्रदर्शित किया गया सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम शामिल रहे। आकाश और अभ्र (MRSAM) मिसाइल सिस्टम भारत की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं।
मुख्य युद्धक टैंकों में अर्जुन टैंक और भीष्म (टी-90) टैंक शामिल थे। वहीं बीएमपी-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल ने भी परेड में हिस्सा लिया, जो आधुनिक हथियारों और नाइट विजन क्षमता से लैस है। परेड में NAMIS-II नाग मिसाइल सिस्टम भी प्रदर्शित किया गया, जो तीसरी पीढ़ी की ‘फायर एंड फॉरगेट’ एंटी-टैंक मिसाइल है। इसके अलावा स्वदेशी तोप प्रणालियां धनुष 155 मिमी तोप और एटीएजीएस ने भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को दिखाया।
ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, रोबोटिक म्यूल्स और बिना चालक वाले वाहनों ने भी परेड में खास ध्यान खींचा। ड्रोन शक्ति लोरी के जरिए कई स्वदेशी ड्रोन और आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया, जो भारत के एआई, रोबोटिक्स और रक्षा निर्माण में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
हवाई शक्ति के रूप में ध्रुव, रुद्र और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर भी शामिल रहे, जिन्होंने निगरानी से लेकर युद्ध समर्थन तक की अपनी क्षमताएं दिखाई। ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को भारत की रणनीतिक ताकत के रूप में पेश किया गया। यह मिसाइल तीनों सेनाओं में शामिल है और इसकी विदेशों में भी मांग बढ़ रही है।
इस साल का गणतंत्र दिवस ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला गणतंत्र दिवस रहा। संविधान को अपनाने की वर्षगांठ के साथ-साथ इस आयोजन ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और मजबूत होती सैन्य शक्ति को दुनिया के सामने प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।





