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PM Modi at UNGA: पीएम मोदी का संबोधन खत्म, आतंकवाद, कोरोना और अफगानिस्तान सहित इन मुद्दों पर रखी बात

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन खत्म हो गया है। वह यूएनजीए के 76वें सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने लोकतंत्र पर कहा कि लोकतंत्र की हमारी हजारों वर्षों की महान परंपरा रही है। इस 15 अगस्त को भारत ने अपनी आजादी के 75 वें साल में प्रवेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद को लेकर बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा है।

अब जानें पीएम मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें।

अब्दुल्ला शाहिद को बधाई दी।

पीएम मोदी ने सभी को नमस्कार करने के बाद अब्दुल्ला शाहिद को अध्यक्ष पद संभालने के लिए बधाई दी।

कोरोना पर बोले पीएम।

उन्होंने आगे कहा कि आपका अध्यक्ष बनना सभी विकासशील देशों के लिए खासकर छोटे विकासशील देशों के लिए गर्व की बात है। गत 1.5 साल से पूरा विश्व सौ साल में आई सबसे बड़ी महामारी का सामना कर रहा है। ऐसी भयंकर महामारी में जीवन गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं और परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत का घर है। जब दुनिया की प्रगति होती है, तो भारत की प्रगति होती है। जब भारत बदलाव करता है तो विश्व बदलता है।

लोकतंत्र पर दुनिया को बताई भारत की विशेषता।

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र की हमारी हजारों वर्षों की महान परंपरा रही है। इस 15 अगस्त को भारत ने अपनी आज़ादी के 75 वें साल में प्रवेश किया। हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। एक ऐसा देश जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अलग-अलग रहन सहन, खान-पान है। ये वाइब्रेंट डेमोक्रेसी का उदाहरण है। ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन की टी स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था वो आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर UNGA को संबोधित कर रहा है।

दूषित पानी पर कही यह बात।

उन्होंने कहा कि दूषित पानी पूरी दुनिया के लिए बड़ी समस्या है। भारत में इस समस्या से निपटने के लिए हम 17 करोड़ घरों में पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के बड़े-बड़े देशों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास जमीनों और घरों के प्रॉपर्टी राइट्स नहीं हैं। आज हम भारत के छह लाख से ज्यादा गांवों में ड्रोन से मैपिंग करा कर करोड़ों लोगों को उनके घर और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड देने में जुटे हैं। ये डिजिटिल रिकॉर्ड लोगों के प्रॉपर्टी विवाद खत्म करने के काम आएगा।आज भारत में 350 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो रहे हैं।

वैक्सीन पर क्या बोले पीएम मोदी।

भारत का वैक्सीन डिलीवरी प्लेटफॉर्म कोवीन एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज़ लगाने के लिए डिजीटल सहायता दे रहा है। मैं UNGA को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली DNA वैक्सीन विकसीत कर ली है जिसे 12 साल से ज्यादा आयु के सभी लोगों को लगाया जा सकता है।

अफगानिस्तान में तालिबान शासन पर मोदी का वार।

यूएन में पीएम मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान की जनता को, वहां कि महिलाओं को, वहां के बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है। इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा। हमारे समंदर भी हमारी साझी विरासत है इसलिए हमें यह ध्यान रखना होगा कि समुद्री संसाधनों को हम यूज करें, दुरुपयोंग नहीं। हमारे समंदर अतरराष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी है। इसलिए हमें विस्तारवाद की दौड़ से बचाकर रखना होगा।

आतंकवाद को लेकर पाक-चीन पर निशाना साधा।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान और चीन का नाम लिए बिना हमला बोला। उन्होंे कहा कि आज विश्व के सामने रेग्रेसिव थिंकिंग और आतंकवाद का खतरा बढ़ता जा रहा है। इन परिस्थितियों में, पूरे विश्व को साइंस बेस्ड रेशनल और विकासवादी सोच को विकास का आधार बनाना ही होगा। उन्होंने कहा कि इस सोच के साथ, जो देश आतंकवाद का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है।

पीएम मोदी ने चाणक्य का उल्लेख किया।

पीएम मोदी ने कहा- भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था ‘कालाति क्रमात् काल एव फलम पिबति’ सब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपने इफेक्टिवनेस को बढ़ाना होगा, विश्वसनीयता को बढ़ाना होगा। यूएन पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों को हमने पर्यावरण और कोविड के दौरान देखा है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रही प्रॉक्सी वॉर, आतंकवाद और अभी अफगानिस्तान के संकट ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है।

रबीन्द्रनाथ टैगोर की बात के साथ उन्होंने भाषण किया ख़त्म।

उन्होंने कहा कि मैं नोबल पुरस्कार विजेता रबिंद्रनाथ टैगोर की बात के साथ अपने भाषण को खत्म करना चाहूंगा। सब दुर्बल अपने शुभ पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ें, तो सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हो जाएंगी। यह संदेश यूएन के लिए जितना प्रासंगिक है, उतना ही हर जिम्मेदार देश के लिए भी प्रासंगिक है। हमारा साझा प्रयास विश्व में शांति बढ़ाएगा। विश्व को स्वस्थ और समृद्ध बनाएगा।

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