‘कृपया कनाडा मत आइए!’ कुशल मेहरा की भावनात्मक अपील और 13 ज़िंदगियों की सच्ची कहानी

विदेश में पढ़ाई के सपनों के पीछे छिपे खौफनाक सच का खुलासा करते हुए लेखक और पॉडकास्टर कुशल मेहरा ने बताया कि उन्होंने कनाडा में मानव तस्करी के जाल में फंसी 13 भारतीय लड़कियों को खुद अपने खर्चे पर भारत वापस भेजा.
साल 2001 से कनाडा में रह रहे इंडो-कनाडाई यूट्यूबर मेहरा ने भारतीय परिवारों को भावनात्मक अपील करते हुए कहा है —
“कृपया अपने बच्चों को कनाडा मत भेजिए, खासकर तब तक नहीं जब तक आप वहाँ के हालात और खतरों को पूरी तरह समझ न लें.”
मेहरा ने पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन से बातचीत में बताया,
“पिछले तीन सालों में मैंने अपनी जेब से पैसे देकर 13 लड़कियों को भारत वापस भेजा है, क्योंकि वे यहाँ सेक्स ट्रैफिकिंग में फँसी हुई थीं. कृपया कनाडा मत आइए.”
कनाडा में भारतीय बेटियाँ फँसी यौन तस्करी में
कुशल मेहरा के अनुसार, सिर्फ टोरंटो में ही करीब 4,000 भारतीय मूल की महिलाएँ देह व्यापार में फँसी हैं, जिनमें ज़्यादातर को फर्जी एजेंटों और झूठे कॉलेज रिक्रूटर्स ने धोखे से वहाँ पहुँचाया.
उन्होंने बताया,
“ये लड़कियाँ 40–50 लाख रुपये खर्च करके कनाडा आती हैं. ज़मीन बेच देती हैं, घर गिरवी रख देती हैं. वापस लौटने के लिए उनके पास कुछ नहीं बचता… और यही उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं ये एजेंट.”
“डिग्री मिल्स” का जाल — झूठे वादे, टूटे सपने
मेहरा ने बताया कि कनाडा में हजारों भारतीय छात्र “डिप्लोमा मिल्स” नामक निजी कॉलेजों के जाल में फँस रहे हैं.
“कई कॉलेज उन्हें झूठे सपने दिखाते हैं कि पढ़ाई के बाद उन्हें ‘पर्मानेंट रेजिडेंसी (PR)’ मिल जाएगी, लेकिन ये डिग्रियाँ बेकार होती हैं.”
उन्होंने साफ कहा कि वाटरलू, यॉर्क या वेस्टर्न यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएँ अलग हैं, लेकिन छोटे निजी कॉलेज सिर्फ “उम्मीद बेचने का कारोबार” कर रहे हैं.
“अगर कॉलेज असली है तो ठीक, लेकिन अगर कोई एजेंट आपको किसी ‘डिप्लोमा मिल’ में दाख़िला दिला रहा है — तो समझ लीजिए वो जाल है जो आपकी ज़िंदगी बर्बाद कर देगा.”
बदले हालात, बढ़ते खतरे
मेहरा ने बताया कि 2020 के बाद कनाडा में श्रमिकों की कमी के कारण सरकार ने इमिग्रेशन बढ़ाया, जिससे अब हाउसिंग क्राइसिस और लोगों में नाराज़गी जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं.
उन्होंने कहा कि 2022 में पारित “मोशन M44” के बाद छात्रों को फुल-टाइम काम करने की अनुमति मिली, जिसके बाद प्रवासियों की संख्या तेजी से बढ़ी.
“महामारी से पहले कनाडा हर साल करीब 3 लाख नए प्रवासियों को लेता था, अब यह संख्या लगभग 10 लाख के पार है. इसी वजह से टोरंटो में किराया ₹500–700 से बढ़कर ₹1,200 से ज़्यादा हो गया है.”
“भारत में ही पढ़ाइए, ज़मीन बचाइए”
मेहरा ने भारतीय अभिभावकों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा —
“अगर पंजाब में एडमिशन नहीं मिल रहा तो हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली या जम्मू में कोशिश कीजिए. अपने बच्चों को फर्जी एजेंटों के ज़रिए कनाडा मत भेजिए. अगर आपके पास ज़मीन है तो खेती कीजिए — भारत में भी अच्छे विश्वविद्यालय हैं.”
कुशल मेहरा की यह चेतावनी विदेश में पढ़ाई के सपने देखने वाले लाखों भारतीय युवाओं के लिए एक सच्ची और दर्दनाक हकीकत दिखाती है — जहाँ कनाडाई सपना अक्सर कर्ज, भेदभाव और निराशा के बुरे सपने में बदल जाता है.





