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उत्तर प्रदेश में इस साल कम बारिश के चलते धान का रकबा काम हुआ

उत्तर प्रदेश में इस साल कम बारिश के चलते धान का रकबा काम हुआ

 

इस साल उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अपेक्षाकृत अब तक कम बारिश हुई है। जिसके कारण राज्य के खेतों में कई फसलों की बुवाई नहीं हो सकी है। बुवाई में देरी के कारण किसान परेशान हैं। हालांकि किसान बारिश में सुधार होने की उम्मीद कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों की माने तो, बारिश में देरी और कम मॉनसून के कारण पहले ही राज्य में चावल के उत्पादन में लगभग 10-15 प्रतिशत का नुकसान हुआ है। यदि बारिश में दो सप्ताह से अधिक की देरी हुई तो इससे चावल उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की हानि हो सकती है. उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के कई राज्यों का यही हाल है। कम उत्पादन की चिंता से किसान परेशान हैं। एक सरकारी आंकड़े के अनुसार इस साल देश में 72.2 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई जबकि साल 2012 से लेकर अब तक देश में कुल 79 लाख से 1 करोड़ हेक्टेयर में बुवाई हो जाती थी।

किसानों के अनुसार धान की फसल अधिकतर बारिश पर निर्भर रहती है। वर्ष 2021 में कुल 203 मिमी बारिश हुई थी, जबकि 15 जून से 15 जुलाई तक 100 मिमी बारिश हुई थी। जिसके सापेक्ष इस साल जून में 75.5 मिमी बारिश हुई, जबकि जुलाई में अब तक सिर्फ 24 मिमी बारिश हुई है। उधर कुछ महीने पहले खाद डीएपी के दामों में बढ़ोतरी हुई थी। किसानों की माने तो बारिश की कमी और खाद की महंगाई के चलते किसानों का धान की फसल से मोह कम हो रहा है। डीएपी के 50 किलो के पैकेट के दाम 1200 रुपये से बढ़कर 1350 रुपये तक पहुंच गए। जिसका असर भी धान की बुवाई में देखने को मिल रहा है।

आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या में कृषि मौसम विज्ञान विशेषज्ञ सीताराम मिश्रा ने कहा कि मानसून में देरी के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में किसान काफी प्रभावित होंगे। क्योंकि इनमें अधिकांश ऐसे किसान हैं जो हाशिए पर रहते हैं, उनकी आर्थिक हालात अच्छी नहीं है. ऐसे सभी किसान मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर हैं क्योंकि उनके पास मशीनीकृत सिंचाई सुविधाओं की कमी है. इसके कारण वे प्रतिकुल मौसम होने पर सिंचाई सुविधाओं का लाभ नहीं ले सकते हैं इसके कारण वो अधिक प्रभावित होते हैं।

गौरतलब है कि बारिश की कमी के कारण इस बार धान की फसल भी नहीं हो पायी।  राज्य में 20 जुन से रोपाई शुरू करने के लिए मई के अंत तक नर्सरी तैयारी की जाती है, ताकि बारिश होने पर बिचड़ों को खेत में रोपाई की जा सके। पर इस बार बारिश के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। एक बीघा खेत के लिए नर्सरी तैयार करने और खेत तैयार करने के लिए 5000 रुपए का खर्च आता है। अगर एक सप्ताह के अंदर किसान खेती नहीं कर पाते हैं तो फिर वो खेती नहीं कर पाएंगे।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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