भारत

कर्नूल बस हादसा: फर्जी लाइसेंस, नशे में बाइक सवार और नियमों की धज्जियां उड़ने से 19 मौतें

आंध्र प्रदेश के कर्नूल में हुई दर्दनाक बस दुर्घटना ने देश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि बस चालक ने फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर लाइसेंस बनाया हुआ था, बाइक सवार शराब के नशे में था और ट्रैवल कंपनी ने भी नियमों की अनदेखी की थी।

शुक्रवार देर रात करीब 2 बजे एक बाइक सवार शिवा शंकर और उसका साथी एर्री स्वामी कर्नूल के पास सड़क पर फिसल गए और डिवाइडर से टकरा गए। हादसे में शिवा शंकर की मौके पर मौत हो गई। स्वामी ने उसका शव हटाने की कोशिश की, लेकिन तभी पीछे से आ रही डबल डेकर बस ने बाइक को रौंद दिया। बाइक के पेट्रोल टैंक में घर्षण से आग लगी और देखते ही देखते पूरी बस में आग फैल गई। 19 यात्री जिंदा जल गए।

फॉरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि हादसे के समय दोनों बाइक सवार शराब के नशे में थे। पुलिस का कहना है कि वे एक ढाबे में शराब पीकर लौट रहे थे और शिवा शंकर तेज रफ्तार में बाइक चला रहा था। बस चालक मिरियाला लक्ष्मैय्या ने सिर्फ 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की है, फिर भी उसने फर्जी 10वीं का सर्टिफिकेट देकर भारी वाहन का लाइसेंस लिया। सड़क पर पहले दो बसों ने बाइक को क्रॉस कर लिया था, लेकिन इस बस के ड्राइवर ने सामने पड़े अवरोध को समय पर नहीं देखा।

जांच में खुलासा हुआ है कि बस को बिना अनुमति स्लीपर कोच में बदला गया था। रि-रजिस्ट्रेशन के नाम पर नियमों को दरकिनार किया गया और बस में सुरक्षा उपकरण जैसे इमरजेंसी हैमर भी उपलब्ध नहीं थे। देश में बिना टेस्ट दिए लाइसेंस बनवाना आम बात हो गई है। लगातार जागरूकता अभियान होने के बावजूद शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाएं हर साल हजारों जान ले रही हैं। 2023 में शराब के नशे में ड्राइविंग से 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

यह हादसा बताता है कि जब तक नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, यात्रियों की जान यूं ही जोखिम में पड़ती रहेगी।

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।
Back to top button