साबरमती रिवरफ्रंट पर पतंगबाजी: पीएम मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज़ की दोस्ती का रंगीन इजहार

अहमदाबाद, 13 जनवरी 2026 – गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में सोमवार को एक अनोखा राजनयिक दृश्य देखने को मिला, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 में एक साथ पतंग उड़ाकर दोनों देशों की बढ़ती नजदीकी को नया आयाम दिया.
#WATCH अहमदाबाद, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साबरमती रिवरफ्रंट पर इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 में पतंग उड़ाई।
(सोर्स: डीडी न्यूज़) pic.twitter.com/Ng8QwLGNur
— NewsMobile Samachar (@NewsMobileHindi) January 12, 2026
गांधी की धरती पर शुरुआत
चांसलर मर्ज़ की भारत यात्रा का पहला पड़ाव साबरमती आश्रम रहा, जहां दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. यह मर्ज़ की चांसलर बनने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अहमदाबाद हवाईअड्डे पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका पारंपरिक स्वागत किया.
आसमान में रंगों की बौछार
आश्रम से निकलने के बाद दोनों नेता सीधे साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा था. रंग-बिरंगी पतंगों से सजे आसमान के नीचे पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ ने पतंगबाजी का आनंद लिया. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत का सिलसिला भी जारी रहा.
सोशल मीडिया पर इस पल के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दोनों नेता पतंग उड़ाते हुए और एक-दूसरे से मुस्कुराते हुए बातें करते नजर आ रहे हैं.
सांस्कृतिक कूटनीति का बेहतरीन नमूना
हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाला यह पतंग महोत्सव गुजरात की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है. इस साल जर्मन चांसलर की भागीदारी ने इस उत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी खास बना दिया है. विश्वभर से आए पतंगबाजों और दर्शकों ने इस राजनयिक मेलजोल को करीब से देखा.
आगे की राह
फ्रेडरिक मर्ज़ की इस यात्रा के दौरान भारत और जर्मनी के बीच व्यापार विस्तार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, नवीकरणीय ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श होने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच दशकों पुराने मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते हैं, और यह दौरा उन्हें नई दिशा देने का संकेत माना जा रहा है.
पतंगबाजी जैसे सांस्कृतिक आयोजन में भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि राजनयिक संबंध केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी दोनों देशों के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.





