ईरान की मिसाइल ताकत कमजोर, आधे लॉन्चर बचे लेकिन सिस्टम फेल: रिपोर्ट

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Iran की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। Institute for the Study of War की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अधिकांश मिसाइल सिस्टम अब “कॉम्बैट इनइफेक्टिव” हो चुके हैं, यानी वे अपने तय सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं।
आधे लॉन्चर बचे, लेकिन क्षमता घटी
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के लगभग 50% मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं, लेकिन इसके बावजूद सिस्टम की ऑपरेशनल क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। किसी सिस्टम के पूरी तरह काम न कर पाने की स्थिति में उसे ‘कॉम्बैट इनइफेक्टिव’ माना जाता है।
मिड-रेंज मिसाइल पर ज्यादा असर
विश्लेषण के मुताबिक, ईरान की मिड-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि शॉर्ट-रेंज सिस्टम अभी भी कुछ हद तक काम कर रहे हैं। हालांकि, उनकी प्रभावशीलता को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
हमलों के बाद घटा मिसाइल लॉन्च
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 20 मार्च के बाद से Israel के खिलाफ ईरान द्वारा किए जा रहे मिसाइल हमलों की संख्या में कमी आई है। इससे संकेत मिलता है कि ईरानी सेना पर ऑपरेशनल दबाव बढ़ रहा है।
US-इजराइल हमलों का असर
28 फरवरी से United States और इजराइल द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों ने ईरान की सैन्य संरचना और नेतृत्व को प्रभावित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों के कारण ईरानी बलों में डर का माहौल है, जिससे उनकी युद्ध क्षमता और मनोबल दोनों प्रभावित हुए हैं।
सेना में कमी और भगदड़ की स्थिति
रिपोर्ट में Pete Hegseth के हवाले से बताया गया है कि ईरानी सेना में बड़े पैमाने पर सैनिकों की कमी और भगदड़ जैसी स्थिति देखी जा रही है। इससे सैन्य अभियानों पर और असर पड़ रहा है।
हथियार उत्पादन भी प्रभावित
ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस पर हमलों के कारण मिसाइल और ड्रोन के उत्पादन पर भी असर पड़ा है, जिससे भविष्य में हथियारों की आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
ईरान का जवाबी हमला जारी
इन सबके बीच Islamic Revolutionary Guard Corps ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। सरकारी मीडिया Press TV के मुताबिक, “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” के तहत “वेव 93” लॉन्च कर इजराइल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।





