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दिवाली के तुरंत बाद हो सकता है दिल्ली में देश का पहला कृत्रिम बारिश प्रयोग

दिल्ली की हवा हर दिन और ज़्यादा खराब होती जा रही है, ऐसे में दिल्ली सरकार एक बड़ा और अनोखा कदम उठाने की तैयारी कर रही है — कृत्रिम बारिश कराने की योजना, यानी बादलों में तकनीक के ज़रिए बरसात करवाना। राजधानी में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर ‘पुअर’ श्रेणी में पहुँच गया है, और इस धुएँ व जहरीली धुंध से राहत पाने के लिए सरकार अब क्लाउड सीडिंग तकनीक पर उम्मीद लगा रही है।

रविवार को दिल्ली सरकार ने इंडिया गेट इलाके में पानी के बड़े-बड़े स्प्रिंकलर लगा कर छिड़काव शुरू किया। यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने की दिशा में एक अहम कोशिश है।
बुधवार सुबह इंडिया गेट के आसपास AQI 269 दर्ज किया गया, जो कि ‘पुअर’ श्रेणी में आता है, यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दी।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि क्लाउड सीडिंग के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और मौसम विभाग की मंज़ूरी मिलते ही इसे तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “अगले 2-3 दिनों में जब मौसम विभाग हमें अनुमति देगा, तो हम क्लाउड सीडिंग का सैंपल ट्रायल करेंगे। बस हमें उपयुक्त बादलों का इंतज़ार है।” सरकार ने IMD के साथ मिलकर पहले से ही ट्रायल फ्लाइट्स भी कर ली हैं, ताकि पायलट टार्गेट ज़ोन से परिचित रहें।

मंत्री ने बताया कि दिवाली के अगले दिन या मौसम अनुसार अगली उचित तारीख़ पर यह प्रयोग किया जाएगा। अनुमति मिलते ही 3 घंटे के भीतर विमान उड़ान के लिए तैयार होगा। इस तकनीक में silver iodide जैसी केमिकल पार्टिकल्स को बादलों में छोड़ा जाता है, जिससे बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर बारिश होती है तो हवा में फैली धूल और जहरीले कण नीचे बैठ जाते हैं, जिससे AQI तेजी से सुधर सकता है।

हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बारिश सिर्फ अस्थायी राहत देती है, क्योंकि असली समाधान वाहनों का धुआँ, पराली जलना, कारखानों का उत्सर्जन और निर्माण धूल जैसे स्रोतों को नियंत्रित करने में है। लेकिन दिल्ली की जनता, जो हर सर्दी धुंध, जलन और सांस लेने में दिक्कत झेलती है — उनके लिए कृत्रिम बारिश उम्मीद की एक किरण बनकर उभरी है।

दिवाली से पहले दिल्ली की लड़ाई अब ज़मीन से आसमान तक पहुँच चुकी है — बचाव नहीं, अब राहत की आस बारिश से।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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