13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट का भावुक फैसला

करीब 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद के 30 वर्षीय हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) देने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है। यह फैसला हरीश के परिवार की याचिका पर सुनाया गया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। फैसले के दौरान कोर्ट का माहौल काफी भावुक हो गया।
फैसला पढ़ते समय भावुक हुए जस्टिस पारदीवाला
फैसला सुनाते समय जस्टिस जे.बी. पारदीवाला कुछ देर के लिए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हरीश राणा कभी एक मेधावी छात्र थे और अपने भविष्य के सपने देख रहे थे, लेकिन एक हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। मामले की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए जस्टिस पारदीवाला की आंखें नम हो गईं और कोर्टरूम में भी भावुक माहौल बन गया।
“उसे इतना दुख झेलने के लिए नहीं छोड़ सकते”
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह फैसला लेना बेहद कठिन है, लेकिन हरीश को इतनी पीड़ा में हमेशा के लिए नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अब वह स्थिति आ गई है, जहां अदालत को अंतिम फैसला लेना ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश के परिवार की भी सराहना की और कहा कि उनके परिवार ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। कोर्ट ने कहा कि किसी से सच्चा प्यार करने का मतलब है कि मुश्किल समय में भी उसकी देखभाल करना।
क्या है पूरा मामला
हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लग गई। इसके बाद से वह लगातार कोमा में हैं और बिस्तर पर ही पड़े हुए हैं।
लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर कई घाव हो गए हैं। वह खुद से सांस नहीं ले सकते और भोजन भी ट्यूब के जरिए दिया जाता है। उनकी देखभाल के लिए लगातार मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है। एम्स के डॉक्टरों की टीम ने हरीश के घर जाकर उनकी जांच की थी और अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि हरीश ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब की मदद से सांस ले रहे हैं और गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के जरिए उन्हें भोजन दिया जा रहा है।
पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने हरीश के परिवार की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि भारतीय कानून में सक्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं है। इसके बाद अगस्त 2024 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मानवीय समाधान तलाशने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को पैसिव यूथेनेसिया की अनुमति दे दी है।





