राजनीति

चीन-पाक गठजोड़ UPA की देन, आज ज्ञान दे रहे हैं ‘चीन गुरु’: जयशंकर

संसद का मानसून सत्र जारी है। लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा हो चुकी है और प्रधानमंत्री मोदी इसका जवाब भी दे चुके हैं। आज राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के आखिरी दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर भारत के सख्त रुख को साफ किया।

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया है। अब “परमाणु धमकी और बातचीत-आतंकवाद एक साथ नहीं चलेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि चीन-पाक गठजोड़ की नींव UPA सरकार ने रखी, जब ग्वादर-हंबनटोटा बंदरगाह बने और चीन को रणनीतिक साझेदार घोषित किया गया। जयशंकर ने कहा कि कश्मीर पर कोई मध्यस्थता नहीं होगी, और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने दुनिया में भारत का पक्ष मजबूती से रखा।
  • विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि 9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने पीएम मोदी को हमले की चेतावनी दी, जिस पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि जवाब करारा होगा। भारतीय सेना की कार्रवाई में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने डीजीएमओ स्तर पर संघर्षविराम की अपील की, लेकिन जयशंकर ने साफ किया कि इसमें किसी देश की मध्यस्थता नहीं हुई और न ही यह व्यापार से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल से 16 जून तक पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई, और 25 अप्रैल को UNSC ने पहलगाम हमले की निंदा की, जबकि भारत उस समय सदस्य नहीं था – यह भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है।
  • जयशंकर ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने तुरंत कई कदम उठाए। इनमें सबसे बड़ा फैसला था सिंधु जल समझौते को रोकना। उन्होंने कहा कि इस समझौते के पीछे भले ही दोस्ती की भावना थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसके बाद सिर्फ हमले किए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने संसद में पाकिस्तान की चिंता की, लेकिन भारत के राज्यों के हितों की अनदेखी की।
  • विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने पहलगाम हमले के बाद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। ये कार्रवाई किसी उकसावे के तहत नहीं थी, बल्कि आतंक के खिलाफ भारत की नई नीति का हिस्सा थी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले बड़े आतंकी हमलों के बाद भी भारत बातचीत करता रहा, जिससे गलत संदेश गया।
  • जयशंकर ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद जब शर्म अल शेख में भारत-पाक बैठक हुई, तो दोनों देशों को आतंकवाद से पीड़ित बताया गया। इससे आतंकवाद को सामान्य बना दिया गया और पाकिस्तान पर कोई ठोस दबाव नहीं डाला गया। उन्होंने कहा कि ऐसे रवैये से दुनिया भारत को गंभीरता से नहीं लेती थी।
  • उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद आतंकवाद पर भारत का रुख पूरी तरह बदल गया है। अब हम हर वैश्विक मंच पर आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बनाते हैं। एफएटीएफ के जरिए पाकिस्तान पर दबाव, आतंकी फंडिंग पर रोक और आतंकी संगठनों को वैश्विक आतंकी घोषित करना इसी नीति का हिस्सा है।
  • जयशंकर ने बताया कि अब भारत ने साफ कर दिया है कि हर आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पहलगाम हमले के बाद भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया कि आतंक अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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