NM वेरिफाइडताज़ा खबरें

फैक्ट चेक: क्या लखनऊ पुलिस ने कहा कि लखनऊ के लुलु मॉल में नामज पढ़ने वाले युवक हिन्दू हैं? पढ़ें वायरल दावे का सच

फैक्ट चेक: क्या लखनऊ पुलिस ने कहा कि लखनऊ के लुलु मॉल में नामज पढ़ने वाले युवक हिन्दू हैं? पढ़ें वायरल दावे का सच

 

सोशल मीडिया पर लखनऊ पुलिस के कथित ट्वीट का एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, स्क्रीनशॉट में लखनऊ पुलिस द्वारा लखनऊ के लुलु मॉल में नमाज पढ़ने वाले युवकों की गिरफ़्तारी को लेकर प्रेस नोट जारी किया गया। प्रेस नोट में लुलु मॉल में नमाज पढ़ने वाले चार युवकों के नाम प्रकाशित किए गए हैं। प्रेस नोट के मुताबिक लखनऊ पुलिस ने मॉल में नमाज पढ़ने को लेकर जिन चार युवकों को गिरफ्तार किया हैं उनमें से तीन हिन्दू हैं।

इसी प्रेस नोट के हवाले सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि समाज में अराजकता फ़ैलाने के लिए लुलु माल में कथित हिन्दू युवकों द्वारा नामज पढ़ीं गयी। फेसबुक पर इसी प्रेस नोट को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि,’ लखनऊ के लुलु मॉल में नमाज़ पढ़ने का मामला याद होगा। CCTV से अब उन नमाज़ पढ़ने वालों के नाम व पता चला हैं-

नाम निम्नलिखित हैं-

1) सरोज नाथ योगी
2) कृष्ण कुमार पाठक
3) गौरव गोस्वामी।
4) अरशद अली ‘

 

दरअसल, कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लुलु मॉल खुला था, मॉल खुलने के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर एक वहाँ के परिसर का एक वीडियो वायरल हुआ, वीडियो में कुछ लोगों को एक कतार में बैठकर नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ी और विवाद खड़ा हो गया। इसलिए मामले में लखनऊ पुलिस ने कार्यवाई की। जिसके बाद अब सोशल मीडिया पर उपरोक्त दावा वायरल हो रहा है।

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक 

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में पता चला कि वायरल दावा गलत है, पकड़े गए सभी आरोपी समुदाय विशेष से हैं और किसी भी आरोपी का किसी अन्य धर्म से संबंध नहीं।

सोशल मीडिया पर लखनऊ पुलिस के वायरल स्क्रीनशॉट को देखने पर हमें इसके भ्रामक होने की आशंका हुई। जिसके बाद हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की। पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले गूगल पर इस मामले से सम्बंधित कुछ कीवर्ड्स के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें अमर उजाला की वेबसाइट पर जुलाई 19, 2022 को छपा एक लेख मिला।

 

लेख के मुताबिक मॉल में नमाज पढ़ने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद लखनऊ पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। लेख में एडीसीपी दक्षिण राजेश कुमार श्रीवास्तव के हवाले बताया गया है कि लुलु मॉल में 12 जुलाई को कुछ युवकों के नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ था। जिसे लेकर विवाद बढ़ने लगा तो मॉल के जनसंपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में तहरीर दी, जिस पर मुकदमा दर्ज किया गया। सीसीटीवी फुटेज से नौ युवक चिह्नित किए गए। इंस्पेक्टर सुशांत गोल्फ सिटी शैलेंद्र गिरि की टीम ने सोमवार देर रात दबिश देकर इनमें से मो. रेहान, आतिफ खान, लुकमान व नोमान को खुर्रमनगर से पकड़ा। ये सभी खुर्रमनगर के अबरारनगर में रहते हैं।

अधिक जानकारी के लिए हमने लखनऊ पुलिस के ट्वीट्स को भी खंगाला। जिसके बाद हमें लखनऊ पुलिस का एक ट्वीट मिला जहाँ लखनऊ पुलिस ने वायरल खबर का भ्रामक बताते हुए पूरी असलियत बताई है। पुलिस ने अपने ट्वीट में लिखा, “सोशल मीडिया पर लुलु मॉल मामले में कुछ युवकों का नाम लेकर भ्रामक खबरें फैलाई जा रही है, जो कि पूर्णतया गलत है।” पुलिस ने आगे लिखा, “लुलु मॉल में 12 जुलाई को नमाज़ पढ़ने के विवाद को लेकर 14 जुलाई को लुलु मॉल प्रबंधन द्वारा अज्ञात नमाजियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस संबंध में कोई भी आरोपी चिन्हित नहीं हो सका है। इसके बाद 15 जुलाई को पुलिस ने तीन युवकों सरोज नाथ योगी, कृष्ण कुमार पाठक और गौरव गोस्वामी को हनुमान चालीसा पढ़ने का प्रयास करने और अरशद अली को नमाज़ पढ़ने के प्रयास में गिरफ्तार किया था। इन चारों युवकों के विरुद्ध धारा 151, 107, 116 सीआरपीसी के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।”

खोज के दौरान हमें ट्विटर पर लखनऊ पुलिस का वह ट्वीट भी मिला जिसे भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा था, बता दें पुलिस ने यह ट्वीट जुलाई 15, 2022 को पोस्ट किया गया था। इसके बाद पुलिस ने जुलाई 19 को मॉल में नमाज पढ़ने को लेकर चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।

 

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमें पता चला कि वायरल दावा भ्रामक है। बता दें सोशल मीडिया पर लखनऊ पुलिस के जिस पोस्ट के हवाले से वायरल दावा किया जा रहा है उसमे पुलिस ने उन चार लोगों के नाम जारी किए जिनमें चार में से तीन आरोपियों को म,मॉल में हनुमान चालीसा पढ़ने और एक को नमाज पढ़ने के प्रयास गिरफ्तार किया गया था।

Show More

Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button