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फैक्ट चेक: सड़क पर नमाज ना पढ़ने को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे के साथ वायरल हुआ तीन साल पुरानी तस्वीर

फैक्ट चेक: सड़क पर नमाज ना पढ़ने को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे के साथ वायरल हुआ तीन साल पुरानी तस्वीर

 

सोशल मीडिया पर सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रही है, इस पोस्ट में एक तस्वीर शेयर की गयी है जिसमें दो युवकों को दीवाल पर एक पोस्टर चिपकाते हुए देखा जा सकता है। तस्वीर के पोस्टर में लिखित भाषा में नमाज पढ़ने वाले लोगों से सड़क पर नमाज न पढ़ने की दरख्वास्त की जा रही है।

इसी पोस्ट के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि आगरा में पुलिस ने सड़क पर बिना अनुमति के नमाज पढ़ने को लेकर 150 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिसके बाद मेरठ की मस्जिद में बैनर टांग दिया गया हैं कि सड़क पर नमाज कोई न पढ़ें।

फेसबुक पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा गया है कि,”आगरा में सड़क पर बिना अनुमति नमाज पढ़ने वाले 150 लोगों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर दी जिसके बाद मेरठ की मस्जिद में बैनर टांग दिए गए हैं कि सड़क पर नमाज कोई न पढ़े। कानून का कड़ाई से पालन हो,तो कानून तोड़ने वाले खुद सुधर जाएंगे, योगी जी का यूपी इसकी मिसाल पेश कर रहा है।

 

 

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

फैक्ट चेक:

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में पता चला कि वायरल तस्वीर पुराना है जिसे इन दिनों भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

वायरल तस्वीर को देखने पर हमें इसके पुराने होने की आशंका हुई, जिसके बाद सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल की। पड़ताल के दौरान हमने सबसे पहले तस्वीर को रिवर्स इमेज टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल तस्वीरअमर उजाला की वेबसाइट पर अगस्त 17, 2019 को छपे एक लेख में मिला।

लेख के मुताबिक साल 2019 के दौरान मेरठ शहर में जुमे की नमाज को लेकर पुलिस ने निर्देश जारी किए थे कि किसी भी धार्मिक स्थल पर सड़क पर नमाज पढ़ी गई तो कार्रवाई होगी। जिसके बाद मुतवल्ली ने पोस्टर चस्पा कराए कि कोई भी नमाजी सड़क पर नमाज न पढ़े।

 

पुष्टि के लिए हमने गूगल पर और बारीकी से खोजना शुरू किया। जिसके बाद हमें मेरठ पुलिस के ट्विटर हैंडल द्वारा अगस्त 16, 2019 को किया गया एक ट्वीट मिला, जहाँ वायरल तस्वीर को पोस्ट किया गया था। मेरठ पुलिस द्वारा जानकारी दी गयी थी कि पटेल मण्डप वाली मस्जिद पर इमाम हाजी अख्तर ने सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर बैनर लगाया था।

पड़ताल के दौरान उपोरक्त प्राप्त तथ्यों से हमें यह पता चला कि वायरल तस्वीर हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2019 के दौरान का जिसे इन दिनों सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

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