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केजरीवाल को चुनाव आयोग का दूसरा नोटिस: यमुना में जहर के आरोपों को साबित करें, नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भारतीय चुनाव आयोग से एक और नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस उनके द्वारा यमुना नदी में जहर मिलाने के आरोपों को सही साबित करने के लिए है. आयोग ने 31 जनवरी सुबह 11 बजे तक केजरीवाल को सटीक जवाब देने और सबूत पेश करने का निर्देश दिया है.

 

पिछले सप्ताह, आयोग ने केजरीवाल को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया था, जिस पर उन्होंने 29 जनवरी तक जवाब दिया. हालांकि, आयोग के अनुसार, केजरीवाल का जवाब संतोषजनक नहीं था और उसमें जरूरी सबूतों की कमी थी. आयोग ने केजरीवाल को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह आरोपों को साबित करने में असफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

 

अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें उन्होंने दावा किया कि हरियाणा सरकार ने जानबूझकर यमुना नदी में जहर मिलाया है, जिससे दिल्ली में एक नरसंहार की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियरों ने समय पर जहरीले पानी का पता लगा लिया और उसे दिल्ली में प्रवेश करने से रोक दिया.

 

आयोग ने कहा है कि केजरीवाल के बयान में तथ्यों का अभाव था और इससे विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ सकता है, जिससे सार्वजनिक अव्यवस्था का खतरा हो सकता है. आयोग ने केजरीवाल से यह स्पष्ट करने को कहा कि किस प्रकार का जहर यमुना में मिलाया गया, उसकी मात्रा, प्रकृति और उसे पहचानने के तरीके के बारे में सबूत पेश करें. साथ ही, उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियरों के नाम और उनके द्वारा अपनाई गई पद्धतियों का भी विवरण मांगा है.

 

चुनाव आयोग ने केजरीवाल को एक आखिरी मौका देते हुए कहा है कि अगर वह 31 जनवरी तक आरोपों को सही साबित करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले में केजरीवाल को अब प्रमाण देने होंगे, अन्यथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

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