ईरानी मिसाइल खतरे के बीच दुबई एयरपोर्ट बंद, सैकड़ों उड़ानें रद्द

दुबई: ईरान की ओर से मिसाइल हमले की आशंका के बाद दुबई के दोनों प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हवाई मार्ग बंद होने के कारण सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या उनका मार्ग बदलना पड़ा। दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई केंद्रों में से एक दुबई में अचानक सन्नाटा छा गया।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में दुबई के मुख्य हवाई अड्डे से लगभग 8 करोड़ 70 लाख यात्रियों ने यात्रा की थी। वर्ष 2025 की पहली तिमाही में ही यहां 2 करोड़ 34 लाख यात्री पहुंचे थे, यानी प्रतिदिन लगभग ढाई से तीन लाख यात्री। 3 जनवरी 2026 को एक ही दिन में 3 लाख 24 हजार यात्रियों का रिकॉर्ड बना था। ऐसे में जब हवाई यातायात रुकता है तो केवल उड़ानें ही नहीं रुकतीं, बल्कि हवाई अड्डा शुल्क, शुल्कमुक्त दुकानों की बिक्री और अन्य आय के स्रोत भी प्रभावित होते हैं।
दुबई की राष्ट्रीय विमान सेवा ने पिछले छह महीनों में लगभग 65 अरब 60 करोड़ दिरहम की आय अर्जित की थी, जो प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यदि एक दिन भी संचालन ठप रहता है तो इस आय का बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है। इसके अलावा दुबई की अन्य विमान सेवा और सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनियां इस शहर को यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच मुख्य जोड़ के रूप में इस्तेमाल करती हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि दुबई के हवाई अड्डे पर अचानक कामकाज रुकने से प्रति मिनट लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यदि 24 घंटे तक संचालन बंद रहे तो सैकड़ों करोड़ डॉलर का नुकसान संभव है। केवल हवाई अड्डे की सीधी आय में ही एक दिन में 1 से 2 करोड़ डॉलर तक की कमी आ सकती है। होटल, दुकानें और भोजनालयों को होने वाला नुकसान अलग है।
एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2023 में विमानन क्षेत्र ने दुबई की कुल अर्थव्यवस्था में लगभग 137 अरब दिरहम का योगदान दिया और लगभग 6 लाख 30 हजार लोगों को रोजगार प्रदान किया। पर्यटन को जोड़ने पर यह आंकड़ा 180 अरब दिरहम तक पहुंच जाता है। दुबई का संपत्ति बाजार और उसका प्रमुख मुक्त व्यापार क्षेत्र भी निर्बाध हवाई संपर्क पर निर्भर है।
इस घटनाक्रम का असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। दुबई का प्रमुख शेयर सूचकांक 1 से 2 प्रतिशत तक गिर गया, जिससे अरबों डॉलर की बाजार पूंजी घट गई। फिलहाल हवाई अड्डों पर विमान खड़े हैं और हालात सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो इसका असर केवल हवाई क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुबई की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।





