Digital Arrest Scam: 92 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर से ₹1.02 करोड़ की ठगी

एक 92 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर एक बड़े साइबर घोटाले का शिकार हो गए, जिसमें सीबीआई अधिकारी बनकर स्कैमर्स ने उन्हें पाँच दिनों के लिए “डिजिटल गिरफ़्तार” कर लिया और उनसे ₹1.02 करोड़ – यानी उनकी पूरी ज़िंदगी की जमा-पूंजी – ट्रांसफर करवा ली.
एफआईआर के अनुसार, खुद को केंद्रीय जाँच ब्यूरो का वरिष्ठ अधिकारी बताकर धोखेबाज़ों ने पीड़ित को अपने नियंत्रण वाले खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया.
शिकायत में कहा गया है, “सीबीआई निदेशक होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति ने मुझसे संपर्क किया और मुझे कथित जाँच के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया, यह आश्वासन देते हुए कि यह 23 दिनों के भीतर वापस कर दिए जाएँगे. मुझे सख़्त हिदायत दी गई थी कि मैं इसे अपने परिवार सहित किसी को भी न बताऊँ.”
प्रोफेसर की आपबीती तब सामने आई जब उसी घर की ऊपरी मंजिल पर रहने वाले उनके भतीजे ने उनकी परेशानी देखी और बीच-बचाव किया. इसके बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई.
साइबर क्राइम ब्रांच के एसएचओ रणजीत सिंह ने पुष्टि की कि धोखाधड़ी, छद्म नाम और जबरन वसूली से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के साथ-साथ आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
सिंह ने कहा, “जांच जारी है और पैसे की वसूली के प्रयास जारी हैं.”
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