छत्तीसगढ़: सुकमा में 29 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटे

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बुधवार, 14 जनवरी 2026 को 29 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस बात की जानकारी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी। आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोग प्रतिबंधित माओवादी संगठन CPI (माओवादी) से जुड़े फ्रंटल संगठनों में सक्रिय थे।
सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि इन माओवादियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में “पूना मार्गम” योजना के तहत सरेंडर किया। यह योजना पुनर्वास और समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन देने के लिए चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले लोग राज्य सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे।
आत्मसमर्पण करने वालों में पोडियम बुधरा भी शामिल है, जो गोगुंडा इलाके में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन (DAKMS) का प्रमुख था। उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था। बाकी माओवादी DAKMS, मिलिशिया और जनताना सरकार जैसे माओवादी संगठनों से जुड़े हुए थे।
पुलिस के अनुसार, हाल ही में गोगुंडा क्षेत्र में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद माओवादियों की गतिविधियों पर काफी असर पड़ा। इसके बाद इलाके में नक्सल विरोधी अभियानों को तेज किया गया और लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए गए, जिससे माओवादी दबाव में आ गए।
अधिकारी ने बताया कि गोगुंडा क्षेत्र दुर्गम और दूरदराज होने के कारण पहले माओवादियों के दरभा डिवीजन का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन सुरक्षा कैंप बनने के बाद इस इलाके में उनकी पकड़ कमजोर हो गई और उनका ठिकाना लगभग खत्म हो गया।
उन्होंने कहा कि इस आत्मसमर्पण से दरभा डिवीजन में माओवादियों का सपोर्ट सिस्टम भी कमजोर हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने माओवादी संगठन से जुड़े अन्य लोगों से भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की और उन्हें सुरक्षा व सम्मानजनक जीवन का भरोसा दिलाया।
गौरतलब है कि इससे पहले 8 जनवरी 2026 को पड़ोसी दंतेवाड़ा जिले में 63 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि 7 जनवरी को सुकमा में 26 माओवादी मुख्यधारा में लौटे थे। वर्ष 2025 में राज्य में 1,500 से अधिक माओवादियों ने सरेंडर किया था। केंद्र सरकार ने देश से माओवाद को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है।




