गगनयान मिशन ने हासिल किए कई बड़े पड़ाव, अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग जारी: सरकार

नई दिल्ली: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ ने कई अहम पड़ाव पूरे कर लिए हैं। केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) की ट्रेनिंग भी जारी है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3) का विकास और जरूरी ग्राउंड टेस्ट पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्शन सिस्टम भी तैयार कर सफलतापूर्वक परीक्षण किए जा चुके हैं।
सरकार के मुताबिक, मिशन के लिए जरूरी लाइफ सपोर्ट सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, क्रू एस्केप सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास और परीक्षण भी पूरा हो चुका है। क्रू एस्केप सिस्टम के लिए पांच तरह के मोटर भी तैयार कर लिए गए हैं।
मिशन से जुड़ा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार हो गया है। इसमें ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी, गगनयान कंट्रोल सेंटर, अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग सुविधा और लॉन्च पैड में किए गए बदलाव शामिल हैं।
सरकार ने बताया कि टेस्ट व्हीकल (TV-D1) मिशन सफल रहा था, जिसमें उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण किया गया। वहीं, अगला परीक्षण TV-D2 अंतिम तैयारियों के चरण में है।
सरकार ने यह भी बताया कि गगनयात्रियों ने रूस के ग्लावकोसमोस में अपनी सामान्य ट्रेनिंग पूरी कर ली है। अब बेंगलुरु स्थित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी में मिशन से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
पहले मानवरहित गगनयान मिशन G1 की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। इसके सभी प्रमुख सिस्टम लगभग तैयार हैं और उनकी असेंबली, इंटीग्रेशन और परीक्षण का काम अंतिम चरण में है।
सरकार ने कहा कि गगनयान मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए वहां क्रू एक्सेस आर्म, बबल लिफ्ट और जिप लाइन जैसी नई सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।
सरकार के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसरो द्वारा स्वदेशी लाइफ सपोर्ट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसे मानव मिशन से पहले मानवरहित गगनयान मिशनों में परखा जाएगा।





