“कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलिए”: प्रियंका गांधी का पीएम मोदी के वीडियो पर तंज

लोकसभा में मंगलवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज, वाटर कैनन और अन्य सख्त कार्रवाई की क्या जरूरत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ गलत व्यवहार किया गया और पूछा कि ऐसी कार्रवाई का आदेश किसने दिया। उन्होंने कहा कि देश के छात्र और उनके परिवार सरकार से जवाब चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि संसद जनता की है और यहां बैठे सभी सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं। लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
छात्रों के हालिया प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि हजारों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। उनका कहना था कि ये छात्र ऐसे परिवारों से आते हैं, जहां माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ी-बड़ी कुर्बानियां देते हैं। ऐसे में अगर मेहनत के बाद भी परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहेगा तो युवाओं का भविष्य और उम्मीद दोनों प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग सिर्फ इतनी थी कि परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। उनका आरोप था कि सरकार ने इन मांगों पर ध्यान देने के बजाय छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की।
प्रियंका गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और उनके परिवारों पर पढ़ाई का आर्थिक और मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सरकार पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, लेकिन सरकार अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने शिक्षा बजट, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए। अपने संबोधन के आखिर में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री के नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी टिप्पणी की। इस दौरान उनके कुछ बयानों पर सदन में हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसका विरोध किया।





