Jagannath Rath Yatra 2026: ‘पहांडी बिजे’ रस्म के साथ शुरू हुआ महाकुंभ, लाखों भक्तों से गूंजी पुरी नगरी
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पुरी: ओडिशा के पवित्र तटीय शहर पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा का भव्य आगाज हुआ। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की रथ यात्रा ‘पहांडी बिजे’ रस्म के साथ शुरू हुई।
पहांडी बिजे: एक अलौकिक दृश्य
12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर से देवताओं को पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे घंटा, काहली और तेलिंगी बाजा की गूंज के साथ बाहर निकाला गया। वैदिक मंत्रोच्चार और ओडिसी नर्तकों की प्रस्तुतियों के बीच देवताओं का स्वागत किया गया। परंपरा के अनुसार, भगवान कृष्ण का दिव्य शस्त्र ‘चक्रराज सुदर्शन’ सबसे पहले देवी सुभद्रा के रथ पर स्थापित किया गया। इसके बाद अन्य देवताओं को क्रमबद्ध तरीके से उनके रथों तक लाया गया।
भव्य रथ और अनुष्ठान
पहांडी रस्म पूरी होने के बाद, पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने रथों पर विराजमान देवताओं की पूजा-अर्चना की। इसके बाद, पुरी के राजा गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने ‘छेरा पहरा’ (सोने की झाड़ू से रथों की सफाई) की रस्म निभाई। इसके बाद ही भक्तों ने रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान किया, जो मुख्य मंदिर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है।
सुरक्षा का अभेद्य घेरा
इस वर्ष रथ यात्रा के शांतिपूर्ण और सुरक्षित संचालन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
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शहर में 13,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
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सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती की गई है।
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तटीय सुरक्षा के लिए भारतीय तट रक्षक (Indian Coast Guard) और नौसेना सतर्क है।
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समग्र सुरक्षा की निगरानी के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
लाखों की संख्या में पहुंचे भक्त ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के जयकारों के साथ भक्ति के सागर में डूबे नजर आए। यह रथ यात्रा आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है।





