Pune Rape Murder Case: 3 साल की बच्ची के दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा

महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष POCSO अदालत ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम) श्रेणी का मानते हुए दोषी को “फांसी देकर मौत तक लटकाए जाने” का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा- यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला
विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत क्रूर और अमानवीय है। अदालत ने माना कि दोषी के सुधरने की कोई संभावना नहीं दिखती, इसलिए इस मामले में मृत्युदंड ही उचित सजा है।
इससे पहले विशेष POCSO अदालत ने भीमराव कांबले को दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य और फोरेंसिक साक्ष्यों की मजबूत कड़ी पेश की, जिससे दोष संदेह से परे साबित हुआ।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 1 मई की है, जब साढ़े तीन साल की बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी दादी के घर नसरापुर आई हुई थी। आरोप है कि 65 वर्षीय भीमराव कांबले बच्ची को नाश्ता और नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया।
इसके बाद आरोपी ने बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। इस घटना से पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।
15 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट
घटना के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस ने मात्र 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हुई।
विशेष लोक अभियोजक अजय मिसार ने अदालत में 55 गवाहों के बयान पेश किए, जिनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, परिजन और पहचान परेड में आरोपी की पहचान करने वाले गवाह शामिल थे।
डीएनए और CCTV समेत कई अहम सबूत
अभियोजन पक्ष ने अदालत में CCTV फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण समेत कई अहम सबूत पेश किए। अदालत ने इन सभी साक्ष्यों को विश्वसनीय माना।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्ची के शरीर पर 18 गंभीर चोटों के निशान मिले थे, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने अपराध की क्रूरता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह
दोषी ठहराए जाने के बावजूद भीमराव कांबले ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया। हालांकि अदालत ने कहा कि आरोपी ने न तो अपने अपराध पर पछतावा दिखाया और न ही उसके सुधार की कोई संभावना दिखाई देती है।
सरकार और न्यायपालिका की सराहना
फैसले के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने त्वरित सुनवाई के लिए न्यायपालिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ जघन्य अपराधों में कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
यह मामला देशभर में बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कानून लागू करने की आवश्यकता को फिर से चर्चा में ले आया है।





