UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बना असम, विधानसभा से विधेयक पास

असम विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को पारित कर दिया है। इस दौरान विपक्षी दलों ने मांग की कि इस विधेयक को पहले एक चयन समिति के पास भेजा जाए, लेकिन बहुमत के आधार पर इसे मंजूरी मिल गई।
इस फैसले के साथ असम देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने UCC को अपनाया है। इससे पहले उत्तराखंड ने वर्ष 2024 में और गुजरात ने इसी वर्ष मार्च में इस कानून को पारित किया था। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने इस तरह का कानून लागू किया, जो संविधान के राज्य नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुरूप माना जाता है। संविधान का अनुच्छेद 44 सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की बात करता है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले कहा था कि यह विधेयक असम की सामाजिक संरचना और विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें कई अहम प्रावधान शामिल हैं, जैसे विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर रोक, बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम।
उत्तराखंड में भी UCC लागू होने के बाद सरकार ने इसकी सराहना की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि इस कानून से महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिली है। सरकार के अनुसार, UCC लागू होने के बाद किसी भी तरह के निजता उल्लंघन के मामले सामने नहीं आए हैं और लाखों विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं।
गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में महिलाओं की सुरक्षा और समानता को ध्यान में रखते हुए UCC विधेयक पारित किया था।
असम विधानसभा सत्र की शुरुआत से ही यह मुद्दा चर्चा में रहा। सत्ता पक्ष ने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि और चुनावी वादे की पूर्ति बताया, जबकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और रायजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया। विपक्ष ने विधेयक के समय और इसके सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।





