
शुक्रवार, 22 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार के लिए एक सकारात्मक शुरुआत रही। INR अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे की बढ़त के साथ 96.18 के स्तर पर कारोबार करता हुआ देखा गया। इससे पहले, गुरुवार को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से रिकवर होकर 96.36 पर बंद हुआ था।
INR में रिकवरी के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकवरी के पीछे कई प्रमुख कारक जिम्मेदार हैं:
कच्चे तेल में नरमी: वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली गिरावट ने रुपये पर दबाव को कम किया है। हालांकि यह $104.21 प्रति बैरल के आसपास है, लेकिन इसमें आई नरमी से निवेशकों को राहत मिली है।
भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया टिप्पणियों से ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के कम होने के संकेत मिले हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम हुई है।
RBI का हस्तक्षेप: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास सकारात्मक असर दिखा रहे हैं। इसके अलावा, 26 मई को होने वाली $5 बिलियन की ‘बाय-सेल स्वैप ऑक्शन’ की खबर से बाजार का विश्वास बढ़ा है।
बाजार का रुख
घरेलू इक्विटी मार्केट में भी तेजी देखी गई। सेंसेक्स 332.39 अंक चढ़कर 75,507.09 पर और निफ्टी 84.60 अंक की बढ़त के साथ 23,747.40 पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को ₹1,891.21 करोड़ के शेयर बेचे थे।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार बढ़ते चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पर विचार कर रही है। कुल मिलाकर, बाजार अब बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतें अभी भी प्रमुख जोखिम कारक बनी हुई हैं।





