VD Satheesan बने केरल के नए मुख्यमंत्री, UDF सरकार की भव्य वापसी

Thiruvananthapuram: Veteran Congress leader V D Satheesan ने सोमवार को केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिसके साथ कांग्रेस के नेतृत्व वाला United Democratic Front (UDF) एक दशक बाद राज्य की सत्ता में लौट आया है।
राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने तिरुवनंतपुरम के Central Stadium में आयोजित भव्य समारोह में 61 वर्षीय Satheesan को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेता, जिनमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi और सांसद Priyanka Gandhi Vadra शामिल रहे। देशभर से कई वरिष्ठ नेता भी इस मौके पर मौजूद रहे।
शपथ लेने के बाद Satheesan ने मंच पर मौजूद नेताओं का अभिवादन किया, जिनमें निवर्तमान मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan और BJP नेता Rajeev Chandrasekhar भी शामिल थे। उन्होंने समारोह में आए कांग्रेस मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की।
20 सदस्यीय कैबिनेट की तैयारी
नई UDF सरकार में कुल 20 मंत्री शामिल होंगे। इनमें कांग्रेस को 11 मंत्रालय मिले हैं।
सूत्रों के अनुसार इस कैबिनेट में 14 मंत्री पहली बार शपथ लेने जा रहे हैं। दो महिला मंत्री और दो अनुसूचित जाति प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
कांग्रेस और सहयोगी दलों का प्रतिनिधित्व
कैबिनेट में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को जगह मिली है, जिनमें Ramesh Chennithala, Sunny Joseph, K. Muraleedharan, A.P. Anil Kumar और T. Siddique जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा IUML और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे गठबंधन सरकार का संतुलन मजबूत किया गया है।
शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी राजनीतिक मौजूदगी
इस शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के शामिल होने की संभावना है।
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra के भी कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है।
कई कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी समारोह में मौजूद रहेंगे।
विधानसभा चुनाव में UDF की जीत
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में UDF ने 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की है।
कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीतकर राज्य में मजबूत वापसी की है। इसी के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हुई।
राजनीतिक महत्व और आगे की उम्मीदें
नई सरकार के सामने विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।
कैबिनेट गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देकर सरकार ने एक संतुलित राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।





