
नई दिल्ली: भारत और Sweden ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करते हुए अपने रिश्तों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) में अपग्रेड कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने एक विशेष बैठक के दौरान नए संयुक्त कार्य योजना (2026-2030) को मंजूरी दी। यह नया समझौता रक्षा, ग्रीन ट्रांजिशन, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, व्यापार और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करेगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वीडन के गोटेबर्ग में आयोजित एक विशेष समारोह में पीएम मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।
‘बायर्स-सेलर्स’ से आगे बढ़े रक्षा संबंध
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और स्वीडन के रक्षा संबंध अब सिर्फ खरीदार और विक्रेता (Buyer-Seller) के पारंपरिक दायरे से बाहर निकल चुके हैं। स्वीडिश कंपनियों द्वारा भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करना इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश अब एक दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच सप्लाई चेन को मजबूत करने, सस्टेनेबल मोबिलिटी और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
वैश्विक शांति और आतंकवाद पर कड़ा रुख
यूरोपीय राउंडटेबल को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता और स्थिरता के साझा मूल्यों से जुड़े हैं। आज के तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में दोनों लोकतांत्रिक देशों का एक साथ आना बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए स्वीडन के प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।





