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तमिलनाडु की राजनीति में उभरे नए चेहरे थलापति विजय, द्रविड़ दलों को दी कड़ी चुनौती

तमिलनाडु की राजनीति में एक नया बड़ा चेहरा तेजी से उभरता दिख रहा है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय अब राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाते नजर आ रहे हैं। साल 2016 में जे. जयललिता और 2018 में एम. करुणानिधि के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े जननेता की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे अब विजय भरते हुए दिखाई दे रहे हैं।

करीब पांच दशक से तमिलनाडु की राजनीति पर द्रविड़ दलों का दबदबा रहा है। इस दौरान सिनेमा और राजनीति का गहरा संबंध भी देखने को मिला। एमजी रामचंद्रन (एमजीआर), जे. जयललिता और करुणानिधि जैसे नेताओं ने फिल्मों से लोकप्रियता हासिल कर राजनीति में बड़ी सफलता पाई। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विजय भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

हालिया चुनावी रुझानों में विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने राज्य की दो बड़ी पार्टियों—द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK)—को कड़ी चुनौती दी है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विजय की पार्टी ने कई सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं।

कौन हैं थलापति विजय?

विजय का पूरा नाम सी. जोसेफ विजय है। उनका जन्म 22 जून 1974 को हुआ था। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक और निर्माता हैं, जबकि उनकी मां शोभा चंद्रशेखर गायिका और फिल्मी दुनिया से जुड़ी रही हैं।

कैसे बने सुपरस्टार?

विजय ने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में बतौर बाल कलाकार की थी। उन्होंने अपने पिता की फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए। साल 1992 में फिल्म ‘नालैया थीरपू’ से बतौर हीरो डेब्यू किया, लेकिन यह फिल्म सफल नहीं रही। इसके बाद 1993 में फिल्म ‘सेंथूरपांडी’ में अभिनेता विजयकांत के साथ काम करने का मौका मिला, जिससे उनके करियर को नई दिशा मिली।

1994 में फिल्म ‘रसिगन’ के दौरान विजय को पहली बार ‘इलैयाथलापति’ यानी ‘युवा नेता’ का नाम दिया गया। बाद में यही नाम छोटा होकर ‘थलापति’ बन गया, जिसका मतलब होता है ‘नेता’ या ‘दल का प्रमुख’।

धीरे-धीरे विजय तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। उनकी फिल्मों के लिए फैंस का जुनून इतना बढ़ा कि रिलीज से पहले उनके पोस्टरों पर दूध चढ़ाने जैसी परंपराएं देखने को मिलीं। कई लोग उन्हें सुपरस्टार रजनीकांत का उत्तराधिकारी भी मानते हैं।

राजनीति में नई शुरुआत

सिनेमा में सफलता हासिल करने के बाद विजय ने राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। उनकी लोकप्रियता और बड़े फैन बेस का असर अब चुनावी राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विजय इसी तरह आगे बढ़ते रहे तो वह तमिलनाडु की राजनीति के अगले बड़े नेता साबित हो सकते हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या थलापति विजय फिल्मों की तरह राजनीति में भी ‘मास्टर’ साबित होते हैं या नहीं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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