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Netanyahu पर बढ़ा दबाव, Ceasefire के बाद विपक्ष का हमला, Israel को बातचीत से बाहर रखा गया


Benjamin Netanyahu को ईरान को लेकर हुए सीज़फायर के बाद अपने ही देश में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यह सीज़फायर Donald Trump की पहल पर हुआ, जिसके बाद इज़राइल की राजनीति गरमा गई है।
विपक्ष के नेता Yair Lapid ने इस फैसले को “ऐतिहासिक राजनीतिक गलती” बताया। उन्होंने कहा कि इस पूरे फैसले में इज़राइल को शामिल ही नहीं किया गया।
Lapid ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसा राजनीतिक नुकसान पहले कभी नहीं हुआ और सरकार कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी तरह फेल रही है।
इज़राइल सरकार ने साफ किया है कि वह सीज़फायर का समर्थन करती है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। सरकार का कहना है कि ईरान को तुरंत Strait of Hormuz खोलना होगा और अमेरिका, इज़राइल व उनके सहयोगियों पर हमले रोकने होंगे। साथ ही यह भी साफ किया गया कि यह सीज़फायर लेबनान पर लागू नहीं होगा।
इस पूरे मामले के बाद इज़राइल में राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। एक तरफ सरकार इसे रणनीतिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ी विफलता मान रहा है।
सीज़फायर के बाद जहां एक ओर तनाव कम होने की उम्मीद है, वहीं इज़राइल के अंदर राजनीतिक टकराव और गहरा हो गया है।