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Anupam Kher Birthday Special: जानिए अनुपम खेर की टॉप 5 फिल्मों के बारे में

अनुपम खेर भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से साबित कर दिया कि उम्र और अनुभव सिर्फ आंकड़े हैं। 1984 में, जब एक 28 साल के युवा ने 65 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया, तो पूरी इंडस्ट्री दंग रह गई।

साल 2026 में भी, उनकी हालिया निर्देशित फिल्म Tanvi The Great की सफलता और Saaransh 2 जैसे प्रोजेक्ट्स की चर्चा करते समय उनके करियर के ये पाँच ऐतिहासिक पड़ाव याद रखना जरूरी है।

जानिए अनुपम खेर की टॉप 5 फिल्मों के बारे में

Saaransh (1984) – An Emotional Debut

महेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनुपम खेर ने बी.वी. प्रधान का किरदार निभाया, जो अपने जवान बेटे को खो चुका होता है।
क्यों खास: सिर्फ 28 साल की उम्र में उन्होंने एक दुखी पिता के दर्द और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी लड़ाई को इतनी गहराई से पेश किया कि उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। आज इसे भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन डेब्यू में गिना जाता है।

Karma (1986) – The Villain ‘Dr. Dang’

जहाँ Saaransh ने उन्हें संवेदनशील अभिनेता के रूप में पेश किया, वहीं Karma ने उन्हें एक खतरनाक खलनायक के रूप में स्थापित किया।

क्यों खास: डॉ. डैंग का किरदार और उनका मशहूर डायलॉग—”इस थप्पड़ की गूँज सुनी तुमने? अब इस गूँज की गूँज तुम्हें ज़िंदगी भर सुनाई देगी” आज भी लोगों की यादों में ताजा है। उनकी ठंडी और शातिर क्रूरता ने उन्हें गब्बर और शाकाल जैसी प्रतिष्ठित विलेन्स की श्रेणी में खड़ा किया।

Dilwale Dulhania Le Jayenge (1995) – A Refreshing ‘Pop’s’

90 के दशक में फिल्मी पिता अक्सर सख्त और रूढ़िवादी होते थे, लेकिन अनुपम खेर ने धरमवीर मल्होत्रा बनकर यह छवि बदल दी।

क्यों खास: राज (शाहरुख खान) के दोस्ताना और समझदार पिता के रूप में उन्होंने ‘फादरहुड’ को नया आयाम दिया। उनकी और शाहरुख की केमिस्ट्री ने फिल्म में कॉमेडी और भावनाओं का बेहतरीन मिश्रण पैदा किया। इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन पुरस्कार भी मिला।

A Wednesday! (2008) – The Commanding Officer

इस थ्रिलर फिल्म में उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रकाश राठौड़ की भूमिका निभाई।

क्यों खास: नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गजों के साथ स्क्रीन साझा करते हुए भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। जिम्मेदार अधिकारी की हताशा और संयम उन्होंने बारीकी से पेश किया, जिससे फिल्म कल्ट क्लासिक बनी।

The Kashmir Files (2022) – A Living Portrait of Pain

हाल के वर्षों में पुष्कर नाथ पंडित का किरदार उनके करियर का एक और शिखर माना जाता है।

क्यों खास: विस्थापित कश्मीरी पंडित के दर्द, यादों और संघर्ष को उन्होंने जिस भावनात्मक गहराई से पेश किया, उसने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया। यह साबित करता है कि 40 साल बाद भी अनुपम खेर दर्शकों की आंखों में आंसू ला सकते हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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