NM वेरिफाइड

NM Verified: ग्राहक का पैर पकड़र कर रोती महिला दुकानदार का यह वीडियो नहीं है असली

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक दुकानदार ग्राहक के पैर पकड़कर उससे खरीदी करने की गुहार करती नजर आ रही है. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि घंटों दुकान में दिखवाए एक-एक सामान, कुछ नहीं खरीदा तो फूट-फूटकर रोने लगी दुकानदार. चलिए इस दावे की पुष्टि करते हैं.

Facebook पर वीडियो पोस्ट करते हुए यूजर ने लिखा, “घंटो की मेहनत, पल भर की बेरुखी- महिला दुकानदार का टूटता हौसला कैमरे में कैद” यूजर ने वीडियो जनवरी 11, 2025 को पोस्ट किया.

NM Verified 

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि यह वीडियो स्क्रिप्टेड है

हमने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए कुछ की-वर्ड्स को गूगल पर सर्च किया तो हमें इस तरह की खबर की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली. न ही किसी न्यूज़ ने इस तरह की घटना को कवर किया था.

हमने अपनी जांच को आगे बढ़ाया और वीडियो की कुछ क्लिप को गूगल सर्च ईमेज जे जरिए खोजने की कोशिश की तो हमारे हाथ एक वीडियो लगा जिसे इंस्टाग्राम पर कंचन दत्ता नाम के एक अकाउंट से पोस्ट किया गया था. इस वीडियो को 9 जनवरी को पोस्ट किया गया था. वीडियो में हैशटेग थे फनी और कॉमेडी.

इसके अलावा हमें Carry wear by besties नामक इंस्टा अकाउंट भी मिला जिसपर दोनों महिलाओं ने खुद वीडियो पोस्ट कर बताया कि यह स्क्रिप्टेड था.

हमने इस अकाउंट की झानबीन की और पाया कि इस अकाउंट पर इस तरह के कई वीडियो हैं जो की मनोरंजन के लिए बनाए गए हैं. इस अकाउंट पर महिलाओं ने इस वीडियो के Behind the scene भी शेयर किए हैं.

निष्कर्ष

अत: हमने अपनी जांच में पाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो जिसमें दावा किया जा रहा है कि घंटों दुकान में ग्राहक को सामान दिखाने के बाद जब ग्राहक ने कुछ नहीं खरीदा तो महिला दुकानदार फूट-फूटकर रोने लगी. दरअसल यह गलत है. यह वीडियो स्क्रिप्टेड है. इसे केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया था, जिसे झूठे दावों के साथ सोशल मीडिया पर वारयल किया जा रहा है.

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।
Back to top button