हंगामे के बीच संसद का मानसून सत्र ठप, अब निगाहें सोमवार की कार्यवाही पर

मानसून सत्र के दौरान संसद में जारी हंगामे और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के चलते शुक्रवार को एक बार फिर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और तख्तियों के साथ वेल में आने के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी दलों से संसद को सुचारू रूप से चलाने की अपील की गई। बैठक में यह सहमति बनी कि सोमवार, 28 जुलाई से संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चलाई जाएगी। इसी दिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा का सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
विपक्षी दल बिहार में चल रही विशेष तीव्र पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चर्चा की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनाव से पहले लाखों मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश है, जिसे उन्होंने लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में करीब 52 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विरोध करने का भी एक मर्यादित तरीका होता है। उन्होंने कहा, “अगर आप संसद नहीं चलाना चाहते हैं… तो फिर कार्यवाही को स्थगित करना पड़ेगा।” साथ ही उन्होंने सदस्यों से अपील की कि जनहित के मुद्दों पर संसदीय मर्यादा के साथ बहस होनी चाहिए। उन्होंने बैनर और तख्तियों के इस्तेमाल को “अलोकतांत्रिक” बताते हुए कहा कि असहमति को सदन के नियमों के तहत रखा जाना चाहिए। बिरला ने सभी दलों को यह भरोसा दिलाया कि गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा कराई जाएगी।
उधर, संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई को शुरू हुआ था, लेकिन तब से लेकर अब तक कई बार दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ चुकी है। सभी की निगाहें अब सोमवार पर हैं, जब संसद के शांतिपूर्ण संचालन और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है।





