विदेश

तुर्की में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता फिर शुरू, लेकिन हल निकलने की उम्मीद कम

तुर्की में बुधवार को रूस और यूक्रेन के बीच आमने-सामने की शांति वार्ता शुरू हुई। करीब सात हफ्तों बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि किसी बैठक में आमने-सामने आए हैं। यह वार्ता तब हो रही है जब युद्ध चौथे साल में प्रवेश करने वाला है। हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक इस बातचीत से कोई बड़ी उम्मीद नहीं जताई है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बातचीत को लेकर पहले ही कहा था कि यह “काफी कठिन” होगी, क्योंकि दोनों देशों की मांगें एक-दूसरे के बिल्कुल उलट हैं।

इससे पहले मई और जून में इस्तांबुल में हुई बैठकों से कुछ मानवीय समझौते हुए थे, जैसे कैदियों की अदला-बदली और मारे गए सैनिकों के शवों की वापसी। लेकिन युद्धविराम या स्थायी शांति समझौते पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस बार की बातचीत में युद्धबंदियों की वापसी और रूस ले जाए गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी को प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा, “हमारा एजेंडा बिल्कुल साफ है।”

हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब तक जेलेंस्की से सीधी मुलाकात से इनकार करते रहे हैं। पुतिन का कहना है कि जेलेंस्की का कार्यकाल खत्म हो चुका है और मार्शल लॉ के चलते नए चुनाव नहीं हुए हैं, इसलिए वह उन्हें यूक्रेन का वैध नेता नहीं मानते। वहीं रूस ने बच्चों को अगवा करने के आरोपों से इनकार किया है।

इसी दिन, जब वार्ता हो रही थी, रूस ने दावा किया कि उसकी सेना ने यूक्रेन के सुमी क्षेत्र में वाराचिने नाम की बस्ती पर कब्जा कर लिया है। रूस इस इलाके को “बफर ज़ोन” बनाने की बात कर रहा है, ताकि यूक्रेनी हमलों से बचाव किया जा सके। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। युद्ध का मोर्चा भी अब और गर्म होता जा रहा है। हाल के हफ्तों में रूस ने कीव और यूक्रेन के अन्य हिस्सों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। जवाब में यूक्रेन ने भी रूस पर ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें एक हमले में रूस के रणनीतिक बमवर्षक बेड़े को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर दबाव बनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर 50 दिनों के भीतर कोई शांति समझौता नहीं होता, तो रूस और उसके सहयोगी देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। हालांकि तुर्की में शुरू हुई वार्ता एक अहम कूटनीतिक पहल है, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी असहमति और युद्ध के बढ़ते हालात को देखते हुए शांति की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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