जैन गुरु की जयंती पर पीएम मोदी का संबोधन, दोहराए देशहित के 9 संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य विद्यानंद महाराज की जयंती के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्य विद्यानंद जी के विचारों ने भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को दिशा और प्रेरणा दी है।
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने मंच से मौजूद लोगों को संबोधित किया और देश के प्रति अपने नौ संकल्पों को दोहराया। उन्होंने लोगों से पानी बचाने, मां की याद में पेड़ लगाने, स्वच्छता अपनाने, लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने, देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने, प्राकृतिक खेती, हेल्दी लाइफस्टाइल, योग और खेल को जीवन में शामिल करने और गरीबों की मदद करने का आह्वान किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया और बताया कि एक जैन संत ने हाल ही में अपने प्रवचन में इस अभियान को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने जैसे ही कहा, “जो हमें छेड़ेगा…” वहां मौजूद लोगों ने जोरदार “भारत माता की जय” के नारे लगाए। हालांकि पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर आगे कुछ नहीं कहा।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा, “आज का दिन भारत की आध्यात्मिक परंपरा के एक महान युग का स्मरण है। पूज्य आचार्य विद्यानंद जी मुनिराज की जन्म शताब्दी का यह पर्व हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 28 जून 1987 को उन्हें आचार्य पद की उपाधि मिली थी, यह केवल एक सम्मान नहीं बल्कि संयम और करूणा की पवित्र परंपरा को आगे बढ़ाने की शुरुआत थी।”
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में उन्हें ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि दिए जाने पर आभार जताया और कहा कि वे खुद को इसके योग्य नहीं मानते, लेकिन भारतीय संस्कृति में संतों से मिली हर चीज को प्रसाद समझकर स्वीकार किया जाता है।
पीएम मोदी ने आचार्य विद्यानंद महाराज की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा जीवन को सेवामय बनाने की बात करते थे और यह जैन दर्शन की मूल भावना के साथ-साथ भारत की चेतना से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा, “भारत एक सेवा और मानवता प्रधान देश है। जब पूरी दुनिया हिंसा को ही समाधान मानती थी, तब भारत ने अहिंसा का रास्ता दिखाया। हमने मानव सेवा को सर्वोपरि रखा।”
प्रधानमंत्री ने प्राकृत भाषा को लेकर भी सरकार की कोशिशों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह भगवान महावीर की उपदेशों की भाषा है, लेकिन उपेक्षा के चलते यह भाषा सामान्य जीवन से दूर होती जा रही थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्राकृत को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिया है और देशभर की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटलीकृत करने का अभियान भी चलाया जा रहा है।
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत को विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना है और सरकार इस लक्ष्य को लेकर देश के सांस्कृतिक और तीर्थ स्थलों के संरक्षण और विकास का कार्य कर रही है।





