जस्टिस यशवंत वर्मा विवाद: तुगलक रोड थाने के SHO समेत 8 पुलिसकर्मियों से पूछताछ

दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर नोट जलने की घटना के बाद जांच तेज हो गई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने तुगलक रोड थाना अध्यक्ष उमेश मलिक सहित कुल आठ पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं।
जिन पुलिसकर्मियों के फोन जब्त किए गए हैं, उनमें हवलदार रूपचंद, सब इंस्पेक्टर रजनीश, दो मोबाइल बाइक पेट्रोलिंग कर्मी और तीन पीसीआर कर्मी शामिल हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने अपने मोबाइल से कोई वीडियो रिकॉर्ड किया था या नहीं। यदि कोई वीडियो बनाया गया था, तो उसकी जांच की जाएगी कि उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
इस पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की न्यायाधीश अनु शिवरामन शामिल हैं।
मंगलवार को जांच समिति ने जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास (30, तुगलक क्रीसेंट) का दौरा किया और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। इस दौरान तीनों जज करीब 30-35 मिनट तक आवास के अंदर रहे और निरीक्षण किया।
जस्टिस वर्मा पर आरोप है कि 14 मार्च की रात करीब 11:35 बजे उनके घर में आग लगी थी, जिसके बाद वहां से अधजली नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई शुरू की है।
इसके अलावा, जस्टिस वर्मा ने जांच समिति के समक्ष पेश होने से पहले वकीलों से सलाह ली थी। बुधवार को उन्होंने कानूनी टीम के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। दिल्ली पुलिस ने भी मामले में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज कर लिए हैं। फिलहाल, जांच जारी है और समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप सकती है।





