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24 जून तक SIT की हिरासत में भेजे गए यौन उत्पीड़न मामले में फंसे JDS नेता प्रज्वल्ल रेवन्ना

24 जून तक SIT की हिरासत में भेजे गए यौन उत्पीड़न मामले में फंसे JDS नेता प्रज्वल्ल रेवन्ना

 

बलात्कार और यौन उत्पीड़न मामले में फंसे जेडीएस नेता प्रज्वल्ल रेवन्ना को अब को 24 जून तक एसआईटी की हिरासत में भेज दिया गया। बता दें कि प्रज्वल रेवन्ना जेडीएस प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पौत्र हैं। जो इन दिनों दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इसके पहले 12 जून को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 18 जून तक एसआईटी की हिरासत में भेजा था, जो उनके विरुद्ध मामलों की जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान से ही प्रज्वल रेवन्ना इन आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस दौरान ही एक अश्लील वीडियो भी वायरल हुआ। वाडियो सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आ गई और जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने उन्हें तलब किया लेकिन वो जांच में शामिल नहीं हुए। पता चला कि रेवन्ना राजनयिक पासपोर्ट पर जर्मनी फरार हो गए हैं।

परिवार और राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद रेवन्ना 31 मई को भारत लौटे जिसके बाद एसआईटी ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। इसके बाद एसआईटी ने रेवन्ना को कोर्ट में पेश किया. जहां, से कोर्ट ने 6 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद एसआईटी ने कोर्ट में रेवन्ना की कस्टडी की अवधि को बढ़ाने की मांग की. कोर्ट ने मांग को स्वीकार करते हुए रेवन्ना को फिर से पुलिस की हिरासत में भेज दिया था. हालांकि, सोमवार को कस्टडी की अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने एक बार फिर से रेवन्ना को कोर्ट में पेश किया. जहां से उन्हें 24 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

बता दें कि साल 2019 में रेवन्न कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। ये उनकी पहली जीत भी थी। उन चुनावों में रेवन्न ने 52.91 फीसदी वोटों के साथ 676,606 हासिल किए थे।  वहीं साल 2024 के चुनाव में भी रेवन्ना हासन लोकसभा सीट से मैदान में थे, लेकिन इस बार उन्हें करारी हार झेलनी पड़ी है। हासन लोकसभा सीट से पूर्व प्रधानमंत्री और प्रज्वल रेवन्ना के दादा एचडी देवगौड़ा तीन बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने साल 2004, 2009 और 2014 में जीत हासिल की थी।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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