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पड़ोसी राज्य पंजाब-हरियाणा ने बढ़ाई राजधानी दिल्ली की मुसीबतें, पराली जलाने के अब तक 8000 मामले आए सामने

प्रदूषण की समस्या से जूझ रही देश की राजधानी दिल्ली की मुश्किलें पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा की वजह से बढ़ती जा रही है। दरअसल दोनों राज्यों में धान की फसल के बाद खेतों में बची पराली जलाने के लिए लगाई जा रही आग के कारण दिल्ली की हवा और खराब होती जा रही है। हरियाणा और पंजाब के अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के 2.5 पीएम प्रदूषण में 10 प्रतिषत हिस्सा धान की नरवाई में लगी आग से उठे धुएं का है.

इस कारण जहरीली हो रही है हवा।

दरअसल हवा की दिशा में मामूली बदलाव भी धान के खेतों से निकलने वाले धुएं को चलाने में मददगार हो सकती है। ऐसे में हवा की रफ्तार का कम होने और तापमान गिरने से हालात और गंभीर हो जाते हैं। क्योंकि इससे प्रदूषण फैलाने वाले तत्व दिल्ली-एनसीआर और गंगा के मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा धुआं हवा को और जहरीला बना देता है।

सैटेलाइट इमेज से पता चली ये सफाई।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (एचएसपीसीबी) (Haryana State Pollution Control Board) के मुताबिक सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच पंजाब में 5,552 आग के मामले दर्ज किए गए. जबकि, हरियाणा में यह आंकड़ा 2,276 है। बता दे आमतौर में खेत में आग के मामले अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नजर आते हैं, जो नवंबर के शुरुआती दो हफ्तों में चरम पर होते हैं।

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पंजाब के इन जिलों में आये पराली के सबसे ज़्यादा मामले।

सैटेलाइट इमेज की मदद से मिले आंकड़ों के अनुसार, आग के मामले पंजाब के तारण तरण में 1361 और अमृतसर में 1435 थे। इन दोनों जिलों में आग सबसे ज्यादा गंभीर रही. जबकि, पटियाला, फिरोजपुर और गुरदासपुर में आग से काफी ज्यादा मामले सामने आए।

हरयाणा के इन जिलों में आये पराली के सबसे ज़्यादा मामले।

हरियाणा में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और अंबाला में 2,678 मामले दर्ज किए। एसएसपीसीबी के सदस्य सचिव एस नारायणन के मुताबिक, ‘इस साल हरियाणा में कटाई 7 से 10 दिन पहले ही शुरू हो गई थी। 2019 के मुकाबले आग के मामले इस साल ज्यादा हैं और हम आने वाले दिनों और हफ्तों में कृषि विभाग और जिला प्रशासन के साथ मिलकर राज्य के पश्चिमी हिस्से पर नजर रखने जा रहे हैं.’।

21 और 22 अक्टूबर को बिगड़ सकती है हवा की स्थिति।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (Indian Institute of Tropical Meteorology) और सफर (सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) (System of Air Quality and Weather Forecasting and Research) का अनुमान बताता है, ’21 से पहले सतह की हवा में बदलाव का अनुमान लगाया गया है, जिसकी वजह से सतह की हवा शांत होगी। इसकी वजह से वेंटिलेशन इंडेक्स कम होगा और एयर क्वालिटी इंडेक्स (air quality index) बिगडे़गा. अनुमान लगाया गया है कि 21 और 22 अक्टूबर को हवा की स्थिति बेहद खराब होगी।

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