कौन बनता है लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, कितनी होती है पॉवर, क्या होते हैं अधिकार, जानें सब कुछ
कौन बनता है लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, कितनी होती है पॉवर, क्या होते हैं अधिकार, जानें सब कुछ
18वीं लोकसभा के लिए बीते दिन INDIA गठबंधन की बैठक हुई जिसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लोकसभा में नेता विपक्ष चुना गया है। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसकी जानकारी दी। प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब को कांग्रेस की ओर से पत्र लिखकर इसकी सूचना दे दी गई है। गौरतलब है कि राहुल गांधी अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में पहली बार लखनऊ बार किसी संवैधानिक पद पर आसीन होने जा रहे हैं।
कौन होता है नेता प्रतिपक्ष
नियमों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए लोकसभा की कुल संख्या का 10 फीसदी यानी 54 सांसद होना जरूरी है। इस बार कांग्रेस को ये पद दिया जाएगा। बता दें कि साल 2014 में मोदी सरकार के बनने के बाद पिछले करीब 10 साल से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहा है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। नेता प्रतिपक्ष का पद 1980, 1989 और 2014 से लेकर 2024 तक खाली रहा है।
लोकसभा में बेहद खास है नेता विपक्ष का पद
राहुल को अब नेता प्रतिपक्ष की अहम जिम्मेदारी मिली है, नेता प्रतिपक्ष की लोकसभा में बड़ी भूमिका होगी। लोकसभा नेता विपक्ष सरकार के आर्थिक फैसलों की समीक्षा कर सकेंगे, लोक लेखा समिति के प्रमुख होंगे नेता विपक्ष, सरकार के आर्थिक मामलों पर टिप्पणी कर सकेंगे नेता प्रतिपक्ष।
क्या होते हैं नेता प्रतिपक्ष के अधिकार
बता दें कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री होता है। यही नहीं है, नेता प्रतिपक्ष विपक्ष की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही कई संयुक्त संसदीय पैनलों और चयन समितियों का भी हिस्सा होता है। इनमें सीबीआई के डायरेक्टर, सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर, भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, मुख्य सूचना आयुक्त, लोकायुक्त और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को चुनने वाली समितियां शामिल हैं। इन कमेटियो के फैसलों में प्रधानमंत्री के साथ ही नेता प्रतिपक्ष की सहमति भी जरूरी होगी।
क्या होती नेता प्रतिपक्ष की सैलरी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संभालने वाले सांसद को केंद्रीय मंत्री के बराबर वेतन मिलता है और उसी के अनुरूप भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। नेता प्रतिपक्ष को हर महीने 3.30 लाख रुपये की सैलेरी मिलती है। साथ ही कैबिनेट मंत्री के आवास के स्तर का बंगला मिलता है। साथ ही कार मय ड्राइवर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. साथ ही जिम्मेदारी निभाने के लिए 14 लोगों का स्टाफ भी होता है।





