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संसद के बजट सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कही यह बात- “कल हम जो बजट पेश करेंगे, वह अमृतकाल का महत्वपूर्ण बजट है”

संसद के बजट सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने कही यह बात- “कल हम जो बजट पेश करेंगे, वह अमृतकाल का महत्वपूर्ण बजट है”

संसद में कल से यानी 23 जुलाई से साल 2024 का पहला बजट सत्र शुरू हो रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों का संबोधन किया इस दौरान पीएम मोदी ने कई बातें कहीं। पीएम मोदी ने कहा कि, “आज सावन का पहला सोमवार है। इस पावन दिन पर एक महत्वपूर्ण सत्र शुरू हो रहा है। मैं सावन के पहले सोमवार पर देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। आज संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। आज पूरे देश की नजर इस पर है। यह एक सकारात्मक सत्र होना चाहिए।”

60 साल बाद कोई सरकार तीसरी बार वापस आयी

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि, “भारत के लोकतंत्र की जो गौरव यात्रा है उसमें ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में मैं देख रहा हूं। व्यक्तिगत रूप से मुझे और हमारे सभी साथियों के लिए भी ये अत्यंत गर्व का विषय है कि करीब 60 साल के बाद कोई सरकार तीसरी बार वापस आए और तीसरी पारी का पहला बजट रखें…. ”

अमृतकाल का सबसे महत्वपूर्ण बजट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कल हम जो बजट पेश करेंगे, वह अमृतकाल का महत्वपूर्ण बजट है। हमें पांच साल का जो अवसर मिला है, ये बजट ​हमारे उन पांच साल की दिशा तय करेगा। ये बजट 2047 के विकसित भारत के सपने मजबूत देने वाला होगा। हर देशवासी के लिए बड़े गर्व की बात है कि भारत बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। गत 3 वर्षों में लगातार 8 प्रतिशत ग्रोथ के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।”

सभी दल पार्टी लाइन से ऊपर उठकर देश के लिए खुद को समर्पित करें

पीएम मोदी बोले, “… मैं देश के सभी सांसदों से अनुरोध करना चाहता हूं कि गत जनवरी से लेकर अब तक हमें जितना संघर्ष करना था। किसी ने राह दिखाने का प्रयास किया किसी ने गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन अब वो दौर खत्म हो चुका है, जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। मैं सभी दलों से कहना चाहता हूं कि पार्टी लाइन से ऊपर उठकर देश के लिए खुद को समर्पित करें और संसद के इस गरिमामय मंच का अगले 4.5 साल तक उपयोग करें। जनवरी 2029 के चुनावी साल में आप कोई भी खेल खेल लें, लेकिन तब तक हमें किसानों, युवाओं और देश के सशक्तिकरण के लिए अपनी भागीदारी निभानी चाहिए…”

140 करोड़ देशवासियों की आवाज को कुचलने का हुआ प्रयास 

उन्होंने कहा कि, “नई संसद के गठन होने के बाद जो पहला सत्र था, 140 करोड़ देशवासियों ने बहुमत के साथ जिस सरकार को सेवा करने का आदेश किया उसकी आवाज को कुचलने का अलोकतांत्रिक प्रयास हुआ। 2.5 घंटे तक देश के प्रधानमंत्री का गला घोंटने का, उनकी आवाज को रोकने का लोकतांत्रिक परंपराओं में कोई स्थान नहीं हो सकता। इसका कोई पश्चाताप तक नहीं है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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