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बच्चों को मोबाइल का आदि बनाने वाले पेरेंट्स हो जाएं सतर्क, आपके बच्चे हो सकते हैं “वर्चुअल ऑटिज्म” के शिकार

हम 21वीं सदी मे हैं और इस सदी को काफी एडवांस माना जाता है. जहां महज 2 से 3 साल के बच्चे भी स्मार्टफोन यूजर्स है. या फिर यह कहिए कि उनके पेरेंट्स ने उन्हे इतनी सी उम्र में स्मार्ट फोन्स और इलेक्ट्रोनिक गैजेट का आदि बना दिया है. जी हां, आज की इस भाग दौड़ भरी इस दुनिया में जब बच्चे रोते हैं या फिर किसी चीज की जिद करते हैं तो अक्सर मां-बाप पीछा छुड़ाने के लिए बच्चों को मोबाइल या कोई और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट थमा देते हैं. ऐसा करके आप तो फुरसत हो जाते है पर आपका बच्चा वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो सकता है.

 

अक्सर मां-बाप दिन भर दुनिया की भाग दौड़ से धके जब अपने बच्चे को परेशान करता देखते है या फिर उन्हें रोते हुए देख चुप कराने के लिए अपना पीछा छुड़ाने के लिए बच्चों को मोबाइल या कोई और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट थमा देते हैं. यह ट्रेंड आजकल काफी आम हो गया है. पर आपको बता दें कि इससे आपका बच्चा शांत तो जरूर हो जाएगा, लेकिन इससे उसे कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताने की लत लग जाती है और यही लत उसे वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार बना देगी.

 

दुनिया भर में हुई तमाम रिसर्च बताती हैं कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनके मानसिक विकास पर भारी असर पड़ता है. उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है. इतना ही नहीं, एक रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल, गैजेट्स और ज्यादा टीवी देखने की लत बच्‍चों का भविष्‍य अंधकार में धकेल रही है. इससे उनमें वर्चुअल आटिज्‍म का खतरा बढ़ रहा है.

 

आखिर क्या है वर्चुअल ऑटिज्म ?

मोबाइल फोन, टीवी और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल या लैपटॉप-टीवी पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों को बोलने में दिक्कत और समाज में दूसरे लोगों के साथ बातचीत करने में परेशानी महसूस होने लगती है. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, इस कंडीशन को ही वर्चुअल ऑटिज्म कहा जाता है.

 

वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण
  • वर्चुअल ऑटिज्म के शिकार बच्चे दूसरों से बातचीत करने से कतराते हैं.
  • ऐसे बच्चे बातचीत के दौरान आई कॉन्टैक्ट से बचते हैं.
  • इन बच्चों में बोलने की क्षमता का विकास काफी देरी से होता है.
  • इन्हें समाज में लोगों से घुलने-मिलने में काफी परेशानियां होती हैं.
  • वर्चुअल ऑटिज्म की चपेट में आने वाले बच्चों का आईक्यू भी कम होता है.

 

वर्चुअल ऑटिज्म से कैसे बचें ?

जैसा कि हमने बताया कि बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म की लत लगाने में सबसे बड़ा हाथ पेरेंट्स का है. तो इससे अपने बच्चों को बचाने के लिए भी पेरेंट्स का ही सपोर्ट लगेगा. जी यदि पेरेंट्स अपने बच्चों को इलेक्ट्रोनिक्स गैजेट्स से दूर रखें और ज्यादातर लोगों के आस पास पलने और बढ़ने दे तो बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होगा और वह इस बीमारी का शिकार नहीं होंगे. इसके अलावा वर्चुअल ऑटिज्म का कोई इलाज नहीं है.

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