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फैक्ट चेक: घरेलु बिजली का अधिक बिल आने पर बनाए गए स्क्रिप्टेड वीडियो को सच बताकर किया जा रहा है वायरल , जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: घरेलु बिजली का अधिक बिल आने पर बनाए गए स्क्रिप्टेड वीडियो को सच बताकर किया जा रहा है वायरल , जानें पूरा सच

 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो कथित तौर पर एक ससुर और उनकी बहु का प्रतीत होता है। जहां ससुर कथित तौर पर घर का अधिक बिजली बिल आने पर पहले तो अचंभित होते हैं बाद में अपनी बहु से बिजली का भुगतान करने के लिए बोलते हैं।

फेसबुक पर वायरल वीडियो को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “अगर एटा में सपा का लगाया हुआ 3 X 660 मेगावाट का थर्मल पॉवर प्लांट सरकार ने चला दिया होता तो जनता को बिजली का बिल देखकर करंट नहीं लगता।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

गौरतलब है कि वायरल वीडियो को उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

 

फैक्ट चेक :

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल वीडियो असली नहीं बल्कि स्क्रिप्टेड हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे सच मान कर शेयर किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखने पर हमे इसके स्क्रिप्टेड होने की आशंका हुई। जिसके बाद हमने वायरल वीडियो को कुछ कीफ्रेम में तब्दील किया और फिर गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमे वायरल वीडियो Bamnawar sarkaar के यूट्यूब चैनल पर मिला। जिसे दिसंबर 29, 2023 को अपलोड किया गया था। हालांकि यूट्यूब पर वीडियो की कोई जानकारी नहीं दी गयी थी।

इसीलिए वीडियो की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने गूगल पर और बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो बिहारी उपाध्याय नामक इंस्टाग्राम यूज़र की प्रोफाइल पर मिला। जिसे हाल ही बीते दिसंबर 25 को अपलोड किया गया था। बिहारी उपाध्याय के इंस्टाग्राम अकाउंट को खंगालने पर हमने जाना कि वह कई अन्य स्क्रिप्टेड वीडियो अपलोड किए गए जो मनोरंजन के लिए बनाए गए थे। बता दें कि बिहारी उपाध्याय ने अपने अकाउंट के बायो सेक्शन में खुद को आर्टिस्ट बताया है।

 

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से यह साफ़ हुआ कि वायरल वीडियो असली नहीं बल्कि स्क्रिप्टेड हैं जिसे मनोरंजन के लिए बनाया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इसे सच मान कर शेयर कर रहे हैं।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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