दिल्ली पुलिस की आर्थिक शाखा ने एक शख्स को किया गिरफ्तार, खुद को IFS अधिकारी बताकर की 36 करोड़ रुपये की हेराफेरी
दिल्ली पुलिस की आर्थिक शाखा ने एक शख्स को गिरफ्तार किया है। इस शख्स पर एक गुजरात के व्यापारी से 36 करोड़ रुपये ठगने का आरोप है।
दरअसल SRM महादेव बायो टॉयलेट प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी . कंपनी ने आरोप लगाया था की उनके एक दोस्त के माध्यम से उनकी मुलाकात श्वेता सोरौत से हुई थी. श्वेता सोरौत ने बताया कि वो Indian head of Intellectual Innovation Think Tank Company की हेड है। इस कंपनी का काम दुनिया भर की तमाम कपनियों का पेटेंट खरीदना और बेचना था. साथ ही श्वेता का दावा था की इनकी कंपनी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट लेने का भी काम करती है।
Delhi Police Economic Offences Wing has arrested a person for impersonating as an IFS officer and cheating a Gujarat based businessman to the tune of Rs 36 Crores. pic.twitter.com/6Nr3EkacJC
— NewsMobile (@NewsMobileIndia) September 3, 2020
श्वेता ने अपने पति पियूष बन्धोपाधय को एक IFS अधिकारी बताया और कहा कि वो PMO में पोस्टेड है; इसी हवाला देते हुए उन्होंने अपने SRM Mahadeo Smart Bio Toilet Pvt. Ltd. के साथ अपने पति की एक मीटिंग तय कराई। पहली मीटिंग मे पियूष ने अपने आप को एक IFS अधिकारी बताया। पीयुष ने अपने आप को Make-in-India, Smart City, Solar Energy का भी प्रमुख बताया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सरकार द्वारा पारित कंपनी का कोई भी प्रस्ताव यानी कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है। इसका सबूत देने के लिए पियूष बन्धोपाधय ने फर्जी दस्तावेज़ भी तैयार रखे थे।
Piyush Bandhopadhyay, a cheater who impersonated as an IFS officer involved in duping Gujrat based businessman of Rs 36 crores arrested by EOW @DelhiPolice @CPDelhi pic.twitter.com/LCLtF5jCX5
— Economic Offences Wing, Delhi (@EOWDelhi) September 3, 2020
और इस तरह की पैसो ही हेरा फेरी।
इस पूरे झूठ के बाद पीयूष बंदोपाध्याय और उनकी पत्नी ने दुबई में स्थित एक कंपनी (Mitsumi Disributors) को इंटेलेक्चुअल इनोवेशन थिंक टैंक (IITT) से पेटेंट खरीदने के लिए मन लिया। उनकी आपसी चर्चा के अनुसार, मित्सुमी डिस्ट्रीब्यूटर्स (Mitsumi Disributors) ने 3.1 मिलियन डॉलर की प्रारंभिक राशि को IITT को भेज दिया।
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जिसके बाद काफी बड़ी राशि मित्सुमी डिस्ट्रीब्यूटर्स से IITT में ट्रांसफर हुई। कुल मिलाकर राशि करीब 36 करोड़ रुपया थी.

पीयूष बंदोपाध्याय अपने IFS अधिकारी वाले झूठ को सच करने के लिए हमेशा पाँच सितारा होटलों में व्यावसायिक बैठकें किया करते थे। तमाम झूठ को सच बताने के लिए वो हमेशा महंगी गाड़ी और ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल करते थे ताकि उनपर किसी को भी शक न हो। अभी बातों को सच बताने के लिए वो हमेशा भारत सरकार में कार्यरत बड़े – बड़े अधिकारियों का नाम अक्सर लिया करता था। यहाँ तक की वो अपना घर भी आये दिन बदलते रहते थे।
बता दे केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पीयूष बंदोपाध्याय के खिलाफ दो और शिकायतें पहले से ही दर्ज थी। जिसके बाद विश्वसनीय इनपुट के आधार पर, पीयूष बंदोपाध्याय को EOW टीम ने नोएडा में उनके किराए के आवास से आखिरकार गिरफ्तार कर लिया । पीयूष बंदोपाध्याय को अपने ग्राहकों से इस्तेमाल के लिए मिली बीकन फिट कार को भी सुरक्षित ठिकाने से बरामद किया गया है। वही पुलिस ने धोखाधड़ी के पैसो से खरीदी गयी संपत्ति के कागजात भी जब्त कर लिए हैं।
फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है।





